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hemantrathore
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अध्यक्ष महोदय, मैं आपको एक बात बतलाना चाहता हूँ। और वह यह है कि उसने उसको जो एक पैसा दिया वह बहुत बड़ी बात नहीं हो सकती है, और न बाद में बुरी बात होती, परन्तु अब वह एवं तुम न जाने कब आ पाओगे जिस तरह भी हो उनको साथ लेकर अति शीघ्र आना, नहीं तो इसका नतीजा क्या होगा। मैंने आपसे कहा था, और वैसा ही हुआ वह यहॉं वहॉं जहॉं कहीं भी हो सका गया पर मार खाने के सिवा कुछ और नहीं पाया। इससे प्रतीत होता है कि ईश्वर स्वत: कुछ नहीं करता लेकिन वह तुम्हारे या हमारे द्वारा सारा काम कराता है, और यदि वह चाहे तो सब कुछ अच्छा हो सकता है, और छोटे-बड़े का अन्तर भी समाप्त हो सकता है। वह न जाने कहॉं गया था वहॉं से भॉंति-भॉंति और तौर-तौर के खिलौने इत्यादि अत्यन्त सस्ते दाम पर लाया। अब क्या आशा की जाये कि सब खुश होंगे। सामने जो लाला साहब लम्बी छड़ी लिए हुए खड़े हैं उनकी बात और बाद में उनके साथी की बात मानी जाती है। सुबह उठकर सबक याद करना चाहिये यह जीवन के लिए जरूरी है। विद्या से सम्बन्ध रखने वाले समाज को इस ओर सब लोगों का ध्यान खींचना चाहिए। दान में रुपया गाय आदि सब कुछ देना चाहिये इसके सबब से सम्पूर्ण दाम तथा धन मिलता है। रात-दिन औरत-मर्द को जब कभी समय मिले थोड़ा-बहुत जो कुछ हो सके ऐसा काम करें जिससे मालूम हो कि कुछ अच्छा हो रहा है।
मैं कहता हूँ, जो तम्हें कहना चाहिये कि किताब उठाकर देखो वास्तव में पास हो सकते हो, ताकत कभी नहीं समाप्त होती है केवल वक्त बदल जाता है। अथवा एकदम से परिवर्तन आ जाता है इन चीजों को ज्यादा इकट्ठा नहीं करना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो उनकी शिकायत करो हो सके तो नेता से नाता जोड़ो और नित्य की बातें सीखों, नहीं तो उस दिन तक नीचे गिरना कोई नया कार्य नहीं है। आवश्यकता हो तो राम की नाई काम क्यों नहीं करते। इन तमाम बातों में ताज्जुब करने की कोई बात नहीं है, तुरन्त तनिक या दो गुना, तीन गुना, चार गुना, जितना का जितना, ज्यों का त्यों क्यों नहीं लौटाते या फिर आप कितना लौटाना चाहते हैं? प्राय: लोग प्रत्येक कार्य को प्रतिकूल परिस्थितियों में साहसपूर्वक न करके छोड़ देते हैं तथा एक तरफ होकर अच्छी तरह तरकीब क्यों नहीं निकाल लेते ऐसा करना करीब-करीब किनारे तक न पहुँचने का कारण नहीं हो सकता है।