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अध्यक्ष महोदय, जब श्री नरसिंहराव ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था तो राष्ट्रपति के आदेश से वे विश्वास का प्रस्ताव लेकर यहॉं आये थे और भारतीय जनता पार्टी ने उस समय भी उस विश्वास के प्रस्ताव के खिलाफ मत दिया था। यह अविश्वास का प्रस्ताव कोई कर्मकांड नहीं है। पिछले कुछ दिनों में देश में ऐसी घटनायें हुयी हैं, 6 दिसंबर के बाद, 6 दिसंबर को और 6 दिसंबर के पहले, जिनके कारण हमारा देश एक बार फिर अपनी तकदीर के तिराहे पर आकर खड़ा हो गया है। 6 दिसंबर को अयोध्या में जो कुछ हुआ, उससे हम दु:खी हैं। हमने प्रधानमंत्री को जो वचन दिया था, उस वचन का पालन करने का वहॉं पूरा प्रयत्न हुआ, मगर उस वचन का पालन नहीं किया जा सका। भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक और विश्व हिन्दु परिषद् के चोटी के नेता वहॉं कार सेवकों को रोकने की कोशिश करते रहे। वीडियो टेप्स इसके साक्षी हैं, उस समय अनेक पत्रकार पिटे हैं, जिनके कैमरे तोड़ दिये गये हैं उनसे हमने माफी मांगी है। पत्रकारों से दुर्व्यवहार इसलिये किया गया क्योंकि वे कार सेवक नहीं चाहते थे कि जॉंच ब्यूरो द्वारा पहल की जा रही है। जॉंच के परिणाम अभी प्रकट नहीं हुये हैं और मैं चाहूँगा कि सरकार के पास जो भी तथ्य हैं, वे हम सबके सामने उसे सदन में रखे। हमारे पास जो भी तथ्य हैं वे हम सदन में रख रहे हैं। मैं तो यहॉं तक कहूँगा कि इस तरह के काम में हिस्सा लेने वाले जो लोग थे, उन्हें स्वयं सामने आकर कहना चाहिए कि हमने तोड़ा है और हम उसका दंड भुगतने के लिये तैयार हैं क्योंकि बड़ी संख्या में उपस्थित कार सेवकों ने इस तरह के काम में हिस्सा नहीं लिया। यह कौन समूह है, यह कहॉं से आया है, किसने संगठित किया है, हम जानना चाहते हैं हमारा संगठन जो अनुशासित संगठन समझा जाता था, जिसकी छवि थी, जिसके बारे में यह कीर्ति थी कि जो तय कर लेते हैं वैसा ही करते हैं। यह हमारे लिये एक बड़े संकट की बात है, बड़ी चुनौती है। आज तो हमारे लिये कठिनाई पैदा हो गयी है। वहॉं केवल ढॉंचा नहीं तोड़ा गया, वहॉं एक मंदिर भी था। मस्जिद में तो नमाज नहीं होती थी। मस्जिद में तो प्रवेश बन्द था मगर मंदिर में पूजा होती थी कोर्ट के आदेश से।
मैं केन्द्र सरकार का संकट भी समझता हूँ और वह संकट कल्याण सिंह सरकार के सामने भी था। फिर भी हमें भरोसा था, इसलिये हम कहते हैं कि अगर प्रधानमंत्री जी के भरोसे को ठेस पहुँची है तो हमें भी ठेस पहुँची है। कल्याण सिंह जी ने इस्तीफा दे दिया। आडवाणी जी ने इस्तीफा दे दिया, अगर केन्द्र सरकार की तरफ से कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। कार सेवा के लिये लोग गये थे, लेकिन उन्हें जब लगा कि हाईकोर्ट का फैसला नहीं आया है और सरयू से बालू लेकर आओ और गड्ढे में पानी डालो।