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VinodYadav1450249
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सम्मान पाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम भी दूसरों का आदर करें। जब हम किसी का आदर करते हैं तो वह हमारे शिष्टाचार से प्रभावित होता है और प्रतिक्रिया में वह भी हमारा आदर करता है। इसी प्रकार हम दूसरों का आदर नहीं करेंगे तो वे हमें घमंडी-अभिमानी समझेंगे और हमारा आदर नहीं करेंगे। आपने कितने महंगे और सुंदर कपड़े क्यों न पहने हों, लेकिन दूसरे आपका आकलन आपके व्यवहार से ही करेंगे। अच्छा व्यवहार सभी को अच्छा लगता है और बुरा व्यवहार किसी को भी अच्छा नहीं लगता। अच्छा व्यवहार करने वाले को शिष्टाचारी कहा जाता है और बुरा व्यवहार करने वाले को अशालीन व्यक्ति। बुरा व्यवहार करने वाले को पूरे समाज में ही बुराई नजर आती है, जबकि अच्छा व्यवहार करने वाले अपने अंदर बुराई खोजकर उन्हें दूर करने की कोशिश करते हैं। हमारे संस्कार यही सिखाते हैं कि हमें अपने से बड़े-बुजुर्गों और महिलाओं का आदर करना चाहिए और अपने से छोटों को प्यार करना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसा करते हैं, बदले में वे भी सम्मान पाते हैं और जो ऐसा नहीं करते हैं, समाज उन्हें हेय दृष्टि से देखता है। हम महज एक नमस्ते या धन्यवाद कहकर कइयों को अपना बना सकते हैं और ऐसा न कहकर हम उन्हें अपना शत्रु भी बना सकते हैं। इसी तरह आपके अच्छे व्यवहार से प्रतिकूल परिस्थितियां भी आपके अनुकूल हो जाती हैं, जबकि गलत व्यवहार से अनुकूल परिस्थितियां आपके प्रतिकूल हो सकती हैं।
कई लोग वस्तुओं को ज्यादा महत्व देते हैं। ऐसे लोग मानते हैं कि उनके पास जब सारी भौतिक सुख-सुविधाएं हैं तो वे किसी से नमस्ते या धन्यवाद क्यों कहें। मनुष्य को कभी भी सांसारिक वस्तुओं पर अभिमान नहीं करना चाहिए। ये वस्तुएं हमारे जीवन का हिस्सा भर हैं, हमारा जीवन नहीं। मनुष्य का जीवन मनुष्य के साथ ही है, किसी भौतिक वस्तु के साथ नहीं। मनुष्य को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि भौतिक वस्तुओं का वह उपयोग करे, लेकिन कभी भी भौतिक वस्तुएं उसका उपयोग न करने पाएं। हर मनुष्य को यही प्रयास करना चाहिए कि वह अपने व्यवहार व कर्म से समाज में आदर्श स्थापित करे। ऐसा करने के लिए उसे अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होता है, क्योंकि संकुचित मानसिकता से ऐसा करना संभव