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RayShariya
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हम खड़े हैं पाकिस्तानी सीमा से करीब दो किमी दूर शाहगढ़ चौकी पर। बीएसएफ से विशेष इजाजत लेने के बाद हम यहां पहुंचे हैं। तैयारी सीमा के उस इलाके को देखने की है, जहां पहली बार अब बिजली पहुंची है। यहां इलाका इतना दुर्गम है कि सोच कर भी सामान्य आदमी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यहां जाने के लिए हम रात करीब 10 बजे बीएसएफ की जिप्सी में सवार हुए। थोड़ी दूर जाने के बाद यहां रास्ता इतना मुश्किल है कि आगे का सफर ऊंट पर तय हुआ। ताकि फेंसिंग तक पहुंच सकें। तेज आंधियों में उड़ती रेत और जबरदस्त गर्मी के बीच यहां हर कदम पर बिच्छू और सांप का खतरा है। हमारे साथ आए जवान ने बताया कि स्थानीय भाषा में यहां रेत में पाए जाने वाले सांप को पिवणा कहते हैं। होते ये एक डेढ़ फीट के ही हैं, लेकिन इतने जहरीले हैं कि काटते ही आदमी मर जाता हैं। बात चल ही रही थी कि हम फेंसिगं के करीब पहुंचे। हमने देखा कैसेट बीएसएफ का इंजीनियर विभाग सीमा को रोशन करने में लगा है।
दरअसल राजस्थान के जैसलमेर से सटी पश्चिमी सीमा का करीब 30 किमी का क्षेत्र ऐसा है, जहां पहली बार बिजली पहुंच रही है। यह इलाका अब तक पूरी तरह अंधेरे में डूबा हआ था। कारण थाा इस दुर्गम इलाके के धोरे (रेत के टीले) ।