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AshishPal9110
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अमेरिका ही नही,दुनिया के कई देशों में नशा गंभीर समस्याख है और युवाओं में इसकी लत का समाज पर ज्यानदा असर होता है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रवपति डोनाल्ड ट्रम्पत ने नशे की लत पर गयान दिया है। वे इसके घातक नतीजों के बारे में बखूबी जानते हैं क्योंिकि उनके बड़े भाई की जान इसी कारण गई थी।
ट्रम्पा ने नशाखोरी के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें कहीं, उन्हो ने कहा कि लोगों की जिंदगी सुरक्षित करने के लिए इस समस्यार से संघर्ष करना होगा। लाखों अमेरिकियों को इसकी समस्यां है । राष्ट्र पति ने नशाखोरी को महामारी तो घोषित किया, लेकिन इसका मुकाबला करने के लिए कोई नया फंड जारी करने की घोषणा नहीं की। इसके पहले वे हेल्थो केयर फंड में कटौीि करने के कारण आलोचनाओं का शिकार हो चुके है।
राष्ट्र पति ने कही कि वे युवाओं को संबोधित करते हुए बड़े पैमाने पर कवज्ञापन अभियान चलाएंगे। जिसमे उन्हें नशाखोरी छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वे कहते है- अगर हम किसी से कहते हैं कि वह नशाखोरी छोड़ दे, तो वह गैरप्रभावी शबद होते हैं। वह बात सुनी नहीं जाती । उसके लिए अभियान चलाना पड़ता है, जो प्रेरक व प्रभावी हो। रोनाल्डे रीगल क दौर में ‘जस्टउ से नो’ कार्यक्रम चलाया गया था। उसमें आज के उपाय ‘देखभाल’ की बजाय ‘सजा’ का प्रावधान था।
वर्ष 2002 की जुलना में आज नशाखोरी से मरने वसले अमेरिकियों की संख्याउ तिगुनी हो चुकी है। उसे रोकने के कानून बेअसर हो रहे है। 2015 तक 20 लाख अमेरिकि नशे की गोलियों के ओर करीब 6 लाख हेरोइन क आदी थे। इसका ज्यारदा विस्ताकर श्वेअत और मध्यकवर्गीय लोगों में होता है। ऐसा नही है कि प्रशासन में उम्मीोद की कोई किरण नही है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेाशन के कमिश्नरर स्कॉउट गॉटलिब चिकित्स कीय उपचार पर ज्याएदा जोर देते हैं, जो प्रभावी है और उसका सकारात्मक असर देखने को मिला है। इससे एक उम्मीरद बंधी है कि इस महामारी को खत्मऔ करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे और लाखें परिवारों को राहत मिलेगी।