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anjulsaxena


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ाननीय सभीपति महोदय, मैं आपकी अनुमति से, शिक्षामंत्री जी ने जो प्रस्ताव सदन के सामने प्रस्तुत किया है, उसका समर्थन करने के लिए खड़ा अवश्य हुआ हूँ लेकिन क्या माननीय मंत्री महोदय जी यह बताने की कृपा करेंगे कि हमारे देश में शिक्षा की नीति का आधार क्या है। शिक्षा की नीति में सबसे प्रमुख बातें क्या होना चाहिए। इस सम्बन्ध में मेरे विचार इस प्रकार हैं कि अपने देश में वे तमाम बच्चे जो पढ़ना चाहते हैं या जिनके माता पिता पढ़ाना चाहते हैं उनको शिक्षा प्राप्त करने का अवसर सुलभ होना चाहिए दूसरी बात यह है कि हमारे देश के गरीब लोगों के लिए शिक्षा सस्ती होनी चाहिए और तीसरी बात यह है कि शिक्षा मिलने के बाद इस बात की गारन्टी होनी चाहिए कि जो लोग पढ़-लिख कर निकलें उनकों किसी किसी काम में लगाया जा सकें। मेरा आशय यह है कि शिक्षा नीति को इन तीन कसौटियों को ध्यान में रखकर व्यवहार में लाया जाना चाहिए। क्या शिक्षा नीति यहाँ की सस्ती है, क्या सभी को सुलभ है तथा क्या वह रोजगार तलब है। मान्यवर इन तीन कसौटियों पर विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुँचेंगे और यह सदन भी इस निष्कर्ष पर पहुंचेगा कि तो शिक्षा सुलभ है सस्ती है और यह रोजगार तलब है। आज शिक्षा के अन्दर भी वर्ग बने हुए है। क्या हाई क्लास के लोगों के लिए है जो कि उन लोगों को पब्लिक स्कूलों के माध्यम से दी जाती है और वहां पर जो बच्चे पढ़ते हैं उन पर कई सौ रुपये प्रति माह व्यय होता है। दूसरी शिक्षा कामन विद्यार्थियों के लिए है, साधारण विद्यार्थियों के लिए है, साधारण विद्यार्थियों का अर्थ है गांवों के गरीब बच्चे, जहाँ स्कूल में टाट पट्टी भी नहीं है। इसके अतिरिक्त इसमें से कुछ ऐसे स्कूल भी है जहाँ यदि जगह है तो वहाँ मास्टर नहीं हैं। इस प्रकार यहाँ शिक्षा की यह दशा कर दी गई है एक शिक्षा उच्च वर्ग के बच्चों के लिए है तथा एक शिक्षा साधारण वर्ग के लोगों के लिए है। इस तरह शिक्षा के क्षेत्र में हमारे देश और प्रदेश में जो अन्याय हो रहा है यह बात हमारे सामने कई वर्षो से चली रही है। कुछ दिनों से यह चर्चा सदन में हो रही थी कि शिक्षा इस तरह निर्धारित की जाये कि उसमें एक समानता लाई जाये और उसके लिए एक पाठयक्रम निर्धारित किया जाये।
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