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VirendraGakre
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।। संसार का एक अटूट सत्य ।। ----
एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, बेटा, मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोजे देना। मेरी यह इच्छा जरुर पूरी करना।
पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पतिा की आखिरी इच्छा बताई। इस पर पंडितजी ने कहा, हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इजाजत नहीं है। लेकिन बेटे की जिद थी कि पिता जी की आखिरी इच्छा पूरी हो। बहस इतनी बढ़ गई कि शहर के पंडितों को जमा किया गया, लिकिन कोई नतीजा नही निकला। इसी दौरान में एक वयक्ति आया और बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिसमें पिता की नसीहत लिखी थी--- मेरे प्यारे बेटे। देख रहे हो...। दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्टरी और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता। एक रोज तुम्हें भी मृत्यु आएगी, तुम्हें भी एक सफेद कपड़े में ही जाना पड़ेगा। लिहाजा कोशिश करना, पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना। गलत तरीके से पैसे न कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना।