words per minute
8
pradeep7309606848
00:00
Speed
गांध्ाी जी संसार को सबसे बड़ी देन है अहिंसा और उसका प्रयोग आज से नहीं हजारों वर्षों से हम अहिंसा को धर्म का एक अंग मानते चले आ रहे है। महात्मा बुद्ध और भगवान महावीर ने तो अपने जीवन अहिंसा के प्यार में अर्पण कर दिये। गांधीजी ने हमारे सामने अहिंसा का एक नया रूप रखा। वह इतना विराट था कि हम लोग उनके कथन पर विश्वास न कर पाते। परन्तु गांधी जी ने जो कुछ कहा उसे अपने जीवन मे ढाल पर पूरा करके दिखाया। अहिंसा के अमोघ अस्त्र द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य को परास्त कर दिया और भारत को परतन्त्रता के बन्धनों से स्वतंत्रा करके दिखाया। अहिंसा का मार्ग जितना सीधा है उतना ही तंग और कठिन भी है। भारत में बेकारी की समस्या का मूल कारण हमारी दोषपूर्ण शिक्षा है। आज की शिक्षा पद्धति नवयुवकों को इस योग्य बनाने में असमथ्र है कि वे कोई व्यवसाय कर सकें। फलस्वरूप कॉलेज, यूनिवसटी से निकलकर युवक नौकरी की तलाश में फिरने लगते हैं। आज की शिक्षा भारतीय जीवन से इतनी दूर है कि पुस्तकों में जो कुछ लिखा है, अथवा छात्रों ने जो पढ़ा हैख् वह दैनिक जीवन के लिए सर्वथा अनुपयोगी होता है। शिक्षा का एक बड़ा भारी दोष यह है कि इसमें व्यावसायिक शिक्षा को कोई स्थान प्राप्त नहीं है। गांध्ाी जी ने कहा था व्यवसायिक शिक्षा के अभाव ने अशिक्षित वर्ग को उपयोगी कार्य के अयोय बना दिया है। इससे उनके शरीर पर भी दुष्प्रभाव पड़ा है।
भारत में यह समस्या कितनी विकराल है इसका अनुमान करना कठिन है। सयुक्त परिवार प्रािा के कारण यह समस्या अभी दबी हुई है। कृषि परिवारों में अप्रत्यक्ष बेकारी देखी जा सकती है। परिवार के पास भूमि तो सीमित रहती है लेकिन परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ती जाती है। परिणाम यह होता है कि भूमि के के छोटे-छोटे टुकड़ो पर अनेक लेाग आश्रित होते है। अन्यत्रा धन्धा न मिलने के कारण वे अपना सारा रम उसी पर नष्ट करते है। फलत- श्रम के अनुपात से आय बहुत कम होती है। हमारी कृषि प्रणाली भी प्राकृतिक सिितियों पर