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UmeshYadav4949
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आरोप विरचित करते समय प्रश्नावली पर उपलबध सभी दस्तावेजों पर विचार किया जाना चाहिए। चाहे उनमें से कुछ अभियुक्त द्वारा अनवेषण के दौरान ही क्यों न पेश किये गये हों।
दोषी होने का अभिवचन यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है तो न्यायाधीश उस अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर उसे स्वविवेकानुसार दोष सिद्ध कर सकता है। अभियोजन साक्ष्य के लिए तारीख़ यदि अभियुक्त अभिवचन करने से इंकार करता है या अभिवचन नहीं करता है या विचारण किये जाने का दावा करता है या धारा 229 के अधीन सिद्ध दोष नहीं किया जाता है तो न्यायाधीश साक्षियों की परीक्षा करने के लिए तारीख़ नियत करेगा। और अभियोजन के आवेदन पर किसी साक्षी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने को विवश करने के लिए कोई आदेशिका जारी कर सकता है। अभियोजन के लिए साक्ष्य ऐसे नियत तारीख़ पर न्यायाधीश ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए अग्रसर होगा जो अभियोजन के समर्थन में पेश किया जाये। न्यायाधीश स्वविवेकानुसार किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा तब तक के लिए, जब तक किसी अन्य साक्षी या साक्षियों की परीक्षा न कर ली जाये, स्थगित करने की अनुज्ञा दे सकता है या किसी साक्षी को अधिरिक्त प्रतिपरीक्षा के लिए पुन: बुला सकता है1 दोष मुक्ति यदि संबद्ध विषय के बारे में अभियोजन का साक्ष्य लेने, अभियुक्त की परीक्षा करने और अभियोजन और प्रतिरक्षा को सुनने के पश्चात् न्यायाधीश का यह विचार है कि इस बात का साक्ष्य नहीं है कि अभियुक्त ने अपराध किया है तो न्यायाधीश दोष मुक्ति का आदेश अभिलिखित करेंगा। प्रतिरक्षा आरंभ करना जहॉं अभियुक्त धारा 232 के अधीन दोष मुक्त नहीं किया जाता है वहॉं उससे अपेक्षा की जायेगी कि अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे। और कोई भी साक्ष्य जो उसके समर्थन में उसके पास हो, पेश करे। यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है तो न्यायाधीश उसे अभिलेख में फाइल करेगा यदि अभियुक्त किसी साक्षी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या चीज पेश करने को विवश करने के लिए कोई आदेशिका जारी करने के लिए आवेदन करता है तो न्यायाधीश ऐसे आदेशिका जारी करेगा जब तक उसका ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किये जायेंगे, यह विचार न हो कि आवेदन इस आधार पर नामंजूर कर दिया जाना चाहिए कि वह तंग करने या विलंब करने या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के प्रयोजन से किया गया है। जब प्रतिरक्षा के साक्षियों की परीक्षा समाप्त हो जाती है तो अभियोजक अपने मामले का उपसंहार करेगा। और अभियुक्त उसका प्लीडर उत्तर देने का हकदार होगा परन्तु जहॉं अभियुक्त या उसका प्लीडर कोई विधि प्रयश उठाता है वहॉं अभियोजन की न्यायाधीश की अनुज्ञा सें ऐसे विधि प्रश्नों पर अपना निवेदन कर सकता है। दोष मुक्ति या दोष सिद्धि कर निर्णय बहस और विधि प्रश्न सुनने के पश्चात् न्यायाधीश मामले में निर्णय देगा यदि अभियुक्त दोष सिद्धि किया जाता है तो न्यायाधीश उस दशा के सिवाय जिसमें वह धारा 360 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करता है दण्ड के प्रश्न पर अभियुक्त को सुनेगा और तब विधि के अनुसार उसके बारे में दण्डादेश देगा।
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