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UmeshYadav4949
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महोदय, ग्रामीण मजदूरों की शिक्षा नीति निर्माता, कार्यान्वयनकर्त्ता तथा ग्रामीण मजदूर संगठनों के मध्य समन्य को समानता के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। ग्रामीण मजदूर संगठन को और सुदृढ़ करने मे किसी शैक्षिक तथा आर्थिक क्रियाकलापों को आरंभ करने से पूर्व ग्रामीण मजदूरों का संगठन अस्पृश्यता जैसे सामाजिक मुद्देपर आधारित होना चाहिए। ग्रामीण मजदूर संगठन को चाहिए कि वे संगठनों की बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओ द्वारा ऋण सुविधाओं का स्थापित करने तथा सरल बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्रामीण मजदूर संगठनों की क्षमता को पहचानने के लिए निरंतर बाहरी सहायता आवश्यक है। ऐसी सहायता शिक्षा और प्रशिक्षण क्रियाकलापों तथा सामाजिक आर्थिक क्रियाकलापों के लिए होनी चाहिए । मजदूरों को ज्ञान और कौशल प्रदान करने में वीडियों के अलावा लोक गीत, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली के खेल जैसे सासंकृतिक कार्यक्रम उपयोगी सिद्ध हो सकते है। अध्ययन सामग्री स्थानीय भाषा में होनी चाहिए तथा स्थानीय सामाजिक-आर्थिक स्थिति के अनुसार होनी चाहिए । प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण - - ग्रामीण मजदूर संगठनों को पर्याप्त स्रोत वक्ता नहीं मिलते इसलिए ग्रामीण मजदूर संगठनों को प्रशिक्षकों को प्रशिक्षणकार्यक्रम को बढ़ावा देना चाहिए। तथा संगठनों के ग्रामीण मजदूर शिक्षा कार्यक्रमों में सुधार लाने हेतु उनकी क्षमता बढ़ाने में सहायता करेगा। इससे सांस्थानिक निर्माण होगा । ग्रामीण मजदूर द्वारा ग्रामीण मजदूर शिक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्षम संघटन मानक एक विशेष विषय होना चाहिए। अपेक्षानुसार कार्य करने के लिए ग्राणीण मजदूर संगठनों को कम से कम 10 से 15 वर्ष तक बाहरी संसधनों को आवश्यकता हो सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीयकृत मतंज होना चाहिए जिसमें केंद्र से संंबंधिकसंगठन तथा स्वतंत्र संगठन सम्मिलित । विभिन्न प्रकार के ग्रामीण मजदूर संगठनों के मध्य संयोजन स्थापित करने के लिए आवश्यक सहायता और सहयोग हेतु अंतराष्ट्रीय क्षम संघठन क मंच उपलब्ध कराना चाहिए। चूँकि सबी भारतीय राज्यों में निम्न स्तर पर पंचायती राज संस्थाना आरम्भकरने की संभावा है इसलिए ग्रामीण मजदूर संगठनों के यह आवश्यक होगा कि वह पंचायती राज संस्थानों के प्रबंध ग्रामीण मजदूरों की उन्नति के लिए सहभागिता को सुनिश्चित करेगा।