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IDVikeshKumar
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यदि मेरी पुत्री सममुच असहाय होती तो उसी दिन उसका पिता उसकी सहायता के लिये आ जाता क्योंकि उसी रात मुझे पता चला गया की राम क्यों नहीं आये सीता और आज मॆ भी आया हूँ सीता का आदेश पालने के लिये सीता का आदेश पालने के लिये क्या आप सीता से मिले है नहीं तो फिर आदेश कैसा जाने से पहले त्याग करने का निण्य लिया तो अपनी परिचारिका के हाथ उसने मुझे एक पत्रिका दी इस पत्रिका को पढ़कर सीता की पुजा और वंदना करने का मन होता इस पर नारी जाति युग युगान्तर तक सीता पर गर्व करती रहेगी। इसलिये तो उसने मुझे रोक दिया था देखो राम जाने से पहले इतना मन करता की आपके श्रीचरण के दर्शन करके जाऊं कौन जाने फिर इस जीवन में अवसर मिले या ना मिले परन्तु आप यदि यहां आयेगे तो राम अपने को दोषी मानकर आपके सामने दृष्य नही उठा सकेंगे मेरे पति पके सामने लज्जित हो ये मैं सहन नही कर सकती इसलिए आप अयोध्या नहीं आयेगें उनसें कोई प्रसन्न नहीं पुचेंगे इसलिये अपनी सपथ आपको देती हूँ। और एक बात की सपथ आपको देती हूँ यदि आप ये सुने की मेरे जाने के पश्चात रागव अपने आप से न संभल सके तब आप उनके पास आयेंगे और उन्हें सात्वना देंगे इस समय उनके पास कोई बड़ा नहीं है पिताजी रहे नही मातायें दूर है और बाकी सब छोटे हैं। इस समय उन्हें आपके सहारे की अति आवश्यकता होगी इसलिये जब तुम्हारी अवस्था से विवश होकर लक्ष्मण ने मुझे ये संदेश भेजा की तुमने कितना कठिन निरण्य तुम संसार विहर होते जा रहे तो मुझे आना पड़ा। क्षमा भईया………