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अनुशासन का अर्थ है नियमपूर्वक चलना। आदेश का पालन या नियम सिद्धान्त का पालन करना ही अनुशासन है। दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि नियमबद्ध जीवन व्यतीत करना ही अनुशासन कहलाता है। वैसे तो सभी के जीवन में अनुशासन की बहुत आवश्यकता है, लेकिन विद्यार्थी जीवन में तो विशेष रूप से इसकी आवश्यकता होती है। अनुशासन ही विद्यार्थी को सभ्य नागरिक एवं चरित्रवान पुरुष बनाने में सहायक होता है। राष्ट्र का निर्माण भी अनुशासन के माध्यम से ही सम्भव है। प्राचीनकाल में राजा लोग भी अपने पुत्रों को गुरुकुल में भेजते थे, ताकि वे अनुशासन में रहकर शिक्षा प्राप्त करें और चरित्रवान और परिश्रमी बनें। विद्यार्थियों के शारीरिक एवं नैतिक विकास के लिए आश्रम में गुरुओं ने कठोर नियम बनाए थे ताकि छात्र अपने जीवन में अनुशासित बने रहें। समय के साथ-साथ शिक्षा में भी परिवर्तन हुआ और गुरुकुल का स्थान छात्रावासीय विद्यालयों ने ले लिया। छात्रावास में भी अनुशासन के लिए नियम बनाए जाते हैं और कड़ाई से उनका पालन कराया जाता है। यदि छात्र अनुशासित है तो उसे दंड की आवश्यकता नहीं पड़ती। यदि किसी ने अनुशासन भंग किया है तो उसे शारीरिक दंड न देकर अन्य प्रकार के दंड देकर सुधारा जाता है। विद्यालय में सभी छात्रों के लिए अनुशासन का पालन करना आवश्यक है। बिना अनुशासन के पढ़ाई का कार्यक्रम सुचारू रूप से नहीं चल सकता। सच्चा अनुशासन वही है जिसमे विद्यार्थी अपनी इच्छा से आदेशानुसार कार्य करे।
अनुशासन का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्त्व है। इसके अभाव में हमारी क्षमताओं का विकास रुक जाता है। प्रकृति के सम्पूर्ण कार्य अनुशासित हैं।
जब-जब प्रकृति ने अनुशासन तोड़ा है, तब-तब पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाएँ जैसे-भूकम्प, सूखा, महामारी आई हैं।