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MohdRiyaz


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ॉपीराइट कानून के तहत कोई व्‍यक्ति या संस्था अपनी मौलिक रचना, फिल्‍म कोई संगीत, ऑडियो आदि को कानूनी रूप से पंजीकृत करा सकता है। कॉपीराइट लेने के बाद उसका उस पर कानूनन अधिकार हो जाता है। इस स्थिति बिना लेखक या रचनाकार की अनुमति के रचना को प्रसारित, प्रचारित या इस्‍तेमाल करना अपराध की श्रेणी मे आता है। कॉपीराइट के तहत अपराधी को एक साल तक की सजा हो सकती है। इसके लिए सिविल मामलों तहत प्रावधान भी है। कॉपीराइट के उल्‍लंघन के मामले में क्षतिपूर्ति का दाबा दिया जा सकता है। किसी ने कॉपीराइट के उल्‍लंघन कर जितना मुनाफा कमाया है, उस हिसाब से क्षतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। कई बार मूल रचनाकार को ही पता नहीं चलता और कोई तीसरा व्‍यक्ति उसको अपने नाम से प्रचारित करने लगता है। ऐसे में लेखक को सिद्ध करना होता है कि असली रचनाकार वही है। कॉपीराइट नही करवाने पर न्‍यायालय में इसे सिद्ध करना मुश्किल होता है। इसलिए आमतौर पर बौद्धिक संपदा को सुरक्षित करवाने के लिए कॉपीराइट लिया जाता है। अगर कोई व्‍यावसायिक उपयोग के लिए किसी की बौद्धिक संपदा का इस्‍तेमाल करता है, तो यह निश्चित तौर पर कानून का उल्‍लंघन है, लेकिन अगर ज्ञानप्रसार के लिए इसका गैरव्‍यावसायिक इस्‍तेमाल हो रहा है। तो चिंता करने की कोई आवश्‍यकता नहीं है। इसे निम्‍न उदाहरणों से समझ सकते है। अगर कोई कवि किसी सार्वजनिक आयोजन में किसी अन्‍य। कवि की रचना का पाठ करे और उस दौरान वह मूल कवि का भी जिक्र करे। तो यह कॉपीराइट का उल्‍लंघन नहीं है। हां, अगर इस दौरान वह लोगों से इसके लिए पैसा लेता है, तो यह कानूनन सही नहीं है। किसी ने फेसबुक पर कुछ लिखा है और कोई अन्‍य व्‍यक्ति उसका संकलन या संपादन करके अपने नाम से प्रकाशित करवा देता है, तो भी यह कॉपीराइट का उल्‍लंघन है। हालांकि इस मामले में मूल लेखक को पहले लेखन के सुबूत देने होंगे। किसी अनाधिकृत स्‍त्रोत जैसे टॉरेंट आदि से फिल्‍म या गाने डाउनलोड करना कॉपीराइट के उल्‍लंघन साथ ही आईटी कानून का भी उल्‍लंघन है। गूगल से फोटो इस्‍तेमाल नहीं की जा सकती। व्‍यावसायिक इस्‍तेमाल से पहले गूगल के बजाय मूल फोटोग्राफर या संबंधित व्‍यक्ति/संस्‍था की अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए उसे रॉयल्‍टी पेमेंट करना होगा। कॉपीराइट स्‍वामी की इजाजत हो, तो फोटोग्राफ आदि के लिए उन्‍हें क्रेडिट देना होगा। किसी गाने को व्‍यावसायिक उपयोग के लिए जैसे रेडियों, टीवी आदि पर चलाने पर रचनाकार को रॉयल्‍टी देनी होती है। बिना सूचना के ऐसा करना भी कानूनन गलत है। अगर कोई व्‍यक्ति किसी सिलेब्रिटी की तस्‍वीर का इस्‍तेमाल करता है, तो यह कॉपीराइट का उल्‍लंघन है। किसी आभूषण डिजाइनर ने कोई आभूषण डिजाइन किया है और उसे देखकर कोई हूबहू वैसा ही आभूषण बनाकर उसका प्रचार प्रसार करने लगे, तो यह भी कानन का उल्‍लंघन है। कॉपीराइट कानून की धारा 52 के अंतर्गत निजी इस्‍तेमाल कानून का उल्‍लंघन नहीं है, लेकिन उसका सार्वजनिक प्रसार नहीं किया जा सकता अगर किसी लेखन, शायरी या कविता के कुछ अंश समीक्षा के उद्देश्‍य से या रिपोर्ट या लेख को समझाने के लिए इस्‍तेमाल होते हैं तो यह निष्‍पक्ष व्‍यवहार के दायरे में आएगा। आमतौर पर ऑरिजिनेटर यानी लेखक प्रदाता का अधिकार उसके मरने के 60 साल बाद तक कानूनी अधिकार होता है, लेकिन यदि किसी ने अधिकार खरीद लिया है, बाद में भी रहेगा।
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