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Lokendarasingh
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आप कितने ही सक्षम और योग्य क्यों न हों, जिंदगी में कुछ काम पूरे करने के लिए दूसरे योग्य लागों की भी जरूरत लगेगी। आदमी की सबसे बड़ी योग्यता है कि स्वयं की ओर दूसरे की काबिलियत को पहचान लें। यदि ऐसा कर लिया तो किसी कार्य के आरंभ में ही उसे आधा जीत चुके होंगे। सबसे महत्वपूर्ण है हमारे भीतर की योग्यता। लागों की उम्र बीत जाती है पर अपने भीतर की काबिलियत को नहीं पहचान पाते। जो जानने की कोशिश करते भी हैं वो इसका प्रमाण दूसरों से ले रहे होते हैं। दूसरे प्रशंसा कर सकते हैं, इशारा कर सकते हैं लेकिन आपके भीतर क्या खासियत है, यह सिर्फ आप ही जान पाएंगे। ऐसे ही सामने वाले की काबिलियत को पहचान लेना भी एक बहुत बड़ी कला है। इस संसार में बहुत से योग्य लोग आपके आसपास होंगे। लेकिन अपने पूर्वग्रह और अहंकार के कारण आप उन्हेंं पहचान नहीं पा रहे होते और यदि पहचान लेते हैं तो उनका उपयोग करने में संकुचित वृत्ति अपनाते हैं। यदि काम बड़ा करना हो तो योग्य व्यक्ति जोड़ने के लिए झुकना भी पड़े तो बुराई नहीं है। इस समय संसार में भांति-भांति की योग्यताएं हैं और कार्यक्षेत्र भी इतने खुले हुए हैं कि कब, किसकी जरूरत पड़ जाए, मालूम नहीं। जब किसी योग्य व्यक्ति को साथ जोड़ें और वह अपनी योग्यता का उपयोग आप के लिए कर रहा हो तो सावधानी से उसकी काबिलियत को अपने भीतर उतारने का प्रयास कीजिए। काम भी हो रहा है और आप सीख भी रहे हैं, ऐसे दोहरे परिणाम वाले अवसर कभी मत चूकिए।