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VarunTiwari
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मान्वर, मैंने अच्छी तरह से विचार करके यह निर्णय लिया है कि जो अभी हो रहा है वह सही है इसके ऊपर आप गंभीरता से विचार करें आपका भला किस बात में है। जिस बात पर आज विवाद हो रहा है, उसका आम जनता से कोई मतलब नहीं है यह लड़ाई किसी खास वर्ग के लोगों के द्वारा लड़ी जा रही है, इससे किसी खास वर्ग का भला होने वाला है। इसके बाद भी आप जिस बात को स्वीकार करने को कह रहे हैं वह हमें स्वीकार है मैं इस मामले की कहराई में जाना नहीं चाहता फिर भी आपके न चाहने के बाद जिस रूप में इसे यहाँ प्रस्तुत किया गया है उसी रूप में मैं इसे पढ़कर सुनाना चाहता हूँ । नेताजी कह रहे थे हमें उन लोगों से कोई मतलब नहीं है, जिन लोगों को इस देश में प्रेम किसी अन्य देश से करते हैं। देश की स्थिति कैसी भी हो ये हमें अपने आधार को मजबूत करता है। और सच्चा देश प्रेम सिखाता है । जो देश पर कुर्बानी देते हैं देश पर अपना सर्वस्व लुटाते हैं, उन्हें आप देशद्रोही कहते हैं और जो देश में देश विरोधी गतिविधियों चलाते हैं उन्हें आप देश भक्त कहते हैं । मैं आपसे सहमत नहीं हूँ ।
महोदय आपने तो इतिहास पढ़ा है, आप इतिहास के जानकार हैं आपको जानकर आश्चर्य होगा कि विदेशी लोग हमारे इतिहास की समीक्षा कर रहे हैं, जिन्हें हमारे इतिहास और धर्म के बारे में कोई जानकारी नहीं है वे ही उस इतिहास के समीक्षक बनेंगे तो आप उनसे क्या उम्मीद करेंगे। मैं तो दुनियाँ से यही आग्रह करता हूँ कि वे भारतीय इतिहास एवं दर्शन का पहले अच्छी तरह से अध्ययन करें और अनुभव करें कि कितना गहरा एवं प्राचीन है । इसके अध्ययन से हमें कितना लाभ होगा। आप फिर पायेंगे कि लोग हमारे वतन की कितनी इज्जत करते हैं। और हमारा विश्व में कौन सा स्थान है।