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VarunTiwari


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भियोन पक्ष कथन का मुख्‍य विवरण प्रथम इत्तिला रिपोर्ट और न्‍यायालय में पेश किये गये साक्षय से प्रकट होता है अभियुक्‍त और परिवादी शिवकुमार एक ही गोत्र के हैं। परिवादी शिवकुमार का मकान अभियुक्‍त के मकान के उत्‍तर दिशा कि ओर है। यह उसका नया नव-निर्मित मकान है, पुरान मकान आबादी में पश्चिम की ओर है। उनके मकानों के बीच में स्थिति परिवादिया का मकान दोनों के मकानों के बीच में स्थिति है जोकि सर्वथा अनुचित है। धारा 368 के अन्‍तर्गत सेशन न्‍यायालय की मृत्‍यु दण्‍डादेश के निष्‍पादन की शक्तियों का उल्‍लेख किया गया है। जब कोई सेशन न्‍यायालय ऐसे किसी अपराध में जो मृत्‍यु दण्‍ड से दंडिनीय है मृत्‍यु दंड का आदेश देता है तो उसका निष्‍पादन तब तक नहीं किया जा सकता है, जब तक कि उच्‍च न्‍यायालय द्वारा ऐसे दण्‍डादेश की पुष्टि नहीं कर दी जाती। लेकिन उच्‍च न्‍यायालय द्वारा ऐसे दण्‍डादेश की पुष्टि कर दिये जाने पर सेशन न्‍यायालय उसका निष्‍पादन करने के लिए वारंट जारी कर सकता है अथवा ऐसा कोई कार्य कर सकता है जो ऐसे दण्‍डादेश के नि‍ष्‍पादन के लिए आवश्‍यक हो। जहां एक से अधिक व्‍यक्तियों के नाम पर दण्‍डादेश पारित किये गये हों, वहां सभी व्‍यक्तियों के नाम पर पृथक-पृथक वारंट जारी किया जाता है और ऐसे वारंट की एक प्रतिलिपि जिला मजिस्‍ट्रेट को सूचनार्थ भेजी जाती है। जब अपील में या पुनिरीक्षण में उच्‍च न्‍यायालय द्वारा मृत्‍यु दण्‍डादेश किया जाता है तब सेशन न्‍यायालय उच्‍च न्‍यायालय का आदेश प्राप्‍त होने पर वारंट जारी करने दण्‍डादेश के क्रियान्वित करायेगा। इस धारा के अन्‍तर्गत सेशन न्‍यायालय धारा वारंट जारी करके ऐसे किसी मृत्‍यु दण्‍ड के आदेश के निष्‍पादन के बारे में प्रावधान किया गया है जो किसी उच्‍च न्‍यायालय द्वारा अपील या पुनिरीक्षण में किया गया हो। जब किसी उच्‍चतम न्‍यायालय को यह प्रतीत कराया जाता है कि न्‍याय के उद्देश्‍यों के लिए यह विदित है कि इस धारा के अधीन आदेश किया जाये, जब वह निदेश दे सकता है कि कोई विशिष्‍ट मामला या अपील एक उच्‍च न्‍यायालय से दूसरे उच्‍च न्‍यायालय को या एक उच्‍च न्‍यायालय के अधीन‍स्‍थ नयायालय दण्‍ड न्‍यायालय के अधीनस्‍थ या वरिष्‍ठ अधिकारिता वाले दूसरे दण्‍ड न्‍यायालय को अंतरित कर दी जाये। उच्‍च न्‍यायालय देश के महान्‍यायावादी या हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर ही इस धारा के अधीन कार्य कर सकता है और ऐसी प्रत्‍येक आवेदन समावेदन द्वारा किया जायेगा जो इस दशा के सिवाय जबकि आवेदक देश का महान्‍यायवादी या राज्‍य का महाधिवक्‍ता है शपथ-पत्र या प्रतिज्ञान द्वारा समर्पित होगा। वादी ने उक्‍त आवेदन पत्र इस आधार पर प्रस्‍तुत किया है कि प्रतिवादीगण ने वादी की साक्षी के बाद दस्‍तावेज पेश किये हैं और इस कारण वश उसे दस्‍तावेज पेश करना आवश्‍यक हो गया है। अत: वादी ने उसका आवेदन पत्र स्‍वीकार कर प्रकरण में अतिरिक्‍त कथन लिये जाने का निवेदन किया है प्रतिवादी द्वारा उक्‍त आवेदन का विरोध किया गया है। प्रकरण के अवलोकन से विदित होता है कि प्रकरण में प्रतिवादी साक्ष्‍य समाप्‍त हो गई है। वादी ने उक्‍त दस्‍तावेज पूर्व में क्‍यों प्रस्‍तुत नहीं किये, इसका कोई युक्तियुक्‍त कारण वादी द्वारा नहीं दिया गया है।अभियोन पक्ष कथन का मुख्‍य विवरण प्रथम इत्तिला रिपोर्ट और न्‍यायालय में पेश किये गये साक्षय से प्रकट होता है अभियुक्‍त और परिवादी शिवकुमार एक ही गोत्र के हैं। परिवादी शिवकुमार का मकान अभियुक्‍त के मकान के उत्‍तर दिशा कि ओर है। यह उसका नया नव-निर्मित मकान है, पुरान मकान आबादी में पश्चिम की ओर है। उनके मकानों के बीच में स्थिति परिवादिया का मकान दोनों के मकानों के बीच में स्थिति है जोकि सर्वथा अनुचित है। धारा 368 के अन्‍तर्गत सेशन न्‍यायालय की मृत्‍यु दण्‍डादेश के निष्‍पादन की शक्तियों का उल्‍लेख किया गया है।
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