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SatyamDwivedi
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अच्छा हुआ कि विपक्ष के दिखावटी विरोध को दरकिनार करते हुए तलाक-ए-बिद्दत को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाने वाला मुस्लिम महिला विधेयक लोकसभा से पास हो गया और इस पर राजनीति की संभावना घट गई। अभी इसे राज्यसभा से पास होना है लेकिन, लोकसभा में तकरीबन 150 की ताकत रखने वाले विपक्ष ने संशोधन के पक्ष में महज चार वोट दिए इसलिए उसके समक्ष वहां भी बाधा पैदा होने की गुंजाइश नहीं है। शाहबानो मामले के दूध की जली कांग्रेस ने शायरा बानो के मामले से निकले इस छाछ को फूंकना भी उचित नहीं समझा और राजद, तृणमूल, अन्नाद्रमुक बीजद और वाममोर्चा ने भी क्षेत्रीय मजबूरियों के बावजूद प्रतीकात्मक विरोध से आगे कदम नहीं बढ़ाया। यह न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए लोकतांत्रिक संस्था के आदर का प्रश्न बना बल्कि कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के शब्दों में सियासत से ज्यादा इंसानियत और स्त्रियों के अधिकार व सम्मान का मसला था। अब जो इस काननू का विरोध कर रहे हैं उनके भीतर या तो अल्पसंख्यक असुरक्षा की ग्रंथि है या फिर कानून के तकनीकी पहलू को लेकर कुछ दिक्कतें।