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AshishPal9110
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सरकारी नोकरी से त्याग पत्र देने के बाद उन्होंने वहां के उद्योग-धन्धों के देखने हेतु विदेश यात्रा की इसी अवधि में निमाज हैदराबाद नेअपनी रियासत में आई भीषण बाड़ की समस्या को हल करने लिए अपने यहां बुला लिया उन्होंने मूसी व उसकी सहयक नदियों परबाध बनाकर वहां की बाढ की समस्या को हमेशा के लिए हल कर दिया इसके बाद उन्हें मैसूर के महाराजा ने बुलाया और उन्हें मैसूर राजय का चीफ इंजीनियर नियुक्त किया सन् 1912 में कावेरी नदी पर कृष्णराज सागर बांध का निर्माण किया, बांध बनने से पूर्व बड़े-बडे़ अंग्रेज इंजीनियरों ने कहा था किया यह बांध नहीं बन सकता तथा इस पर लगने वाला करोड़ों रुपया व्यर्थ जाएगा इस बांध के निर्माण से सारे विश्व में उनकीख्याति हुई सन् 1912 में उन्हें मैसूर राज्य का दीवान बनाया गया सन 1918 तक वे दीवान पर पर रहे इस अवधि में उन्होंने वहा कई उद्योग-धंधे चालू किए, जिनमें भद्रकाली का इस्पत का कारखाना उल्लेखनीय है शिक्षा के क्षेत्र में मैसूर विश्वविद्यालय की स्थापना की यह भारत का छठा विश्वविद्यायलय था उनके कुश्ल एवं सफल प्रशासन की चर्चा लोग आज भी करते हैं देश में नियोजित अर्थव्यवस्था पर ाकर्य करने वाले वे प्रथम व्यक्त्िा थें तथा इस विषय पर उन्होंने अपनी पुस्तक पलन्ड इकोनॉमी फॉर इंडिया प्रकाशित कराई थी भारत में प्रकाशित याह अपने विषय की प्रथम पुसतक थी बाद में उन्हें टाटा इस्पात का डायरक्टर बनाय गया जिस पद पर वे 1927 से 1955 तक रहें लगभग 90 वर्ष की आयु मे पटना के समीप माकामी पर गंगा पुल का निमार्ण करके उन्हाने सरेदेश को हैरत में उाल दिया सारे देश ने उनकी योगयता पुरुषार्थ एवं अद्भूुत संगठन शक्ति के लिए आदर सम्मान प्रकट किया इस संबध मे 1913 में आन्ध्र प्रदेश विश्वविद्यालय ने मानद उपाधियों विभूषित किया भारत की व्रिटिश सरकार ने उन्हैं