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SURYAKANTPAVAIYA
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पुलिस थाना, जबलपुर में श्रीमती रानी ने प्रथम सूचना लेख कराई कि जबलपुर में न्यू जबलपुर गारमेंटस के नाम से उसकी दुकान है। दिन मे लगभग ढाई बजे एक ग्राहक ने उसकी दुकान के सामने अपनी स्कूटी खड़ी की, तभी पड़ोसी दुकानदार चिल्लाया और उस ग्राहक को स्कूटी हटाने के लिए कहा। जब वह ग्राहक अपनी स्कूटी हटा रहा था तब उसकी मोटरसाइकिल गिर गई, जिसके कारण वह उसे गालियां देने लगा। जब उसने गालियां देने से मना किया तो उसे हाथ पकड़कर दुकान के बाहर खींचकर लाया और इसी बीच उसने बांयें हाथ से सिर में प्रहार किया तथा नीचे गिरा दिया जिससे उसके हाथ, गर्दन, सिर पर चोटें आईं घटना के समय साक्षी भी सामने थे।
चिकित्सीय परीक्षण में आहत की बांयीं अग्र भुजा पर कटा हुआ भाग जिससे खून बह रहा था और उसके सिर के बांयीं ओर आकार का कटा हुआ घाव था जिससे खून बह रहा था। दोनों चोटें कड़ी धारदार वस्तुओं से परीक्षण से दो से चार घंटे के भीतर पहुंचाई गई थीं। दोनों चोटें साधारण प्रकृति की थी। मरीज को उल्टी की शिकायत थी इसलिए उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। अनुसंधान पूर्ण होने पर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अपनी मुख्य परीक्षा में आहत का यह कथन था कि अभियुक्त ने उसे पकड़कर धक्का-मुक्की कर दुकान के बाहर निकालकर उसे सिर के बल नीचे पटक दिया, जिससे उसे चोटें आईं। अभियुक्त ने उसके बांयें हाथ और सिर में कैंची से मारा अपने प्रतिपरीक्षण में आहत ने यह स्वीकार किया कि उसने प्रथम सूचना प्रतिवेदन तथा अपने पुलिस कथन में यह बात नहीं बताई थी कि अभियुक्त ने उसे सिर के बल पटक दिया था और अभियुक्त ने उसके बांयें हाथ और सिर में कैंची से प्रहार किया था। उसने यह भी स्वीकार किया कि दुकान खाली कराने के संबंध में अपने पड़ोसी दुकानदार अभियुक्त ने उसकी पूर्व रंजिश थी। आहत ने बचाव पक्ष के इस सुझाव से इंकार किया कि उसे गिराने से चोटें आई।
प्रत्यक्षदर्शी साक्षी ने अपने साक्ष्य का अभियोजन कहानी की पुष्टि नहीं की है। अभियोजन पक्ष ने उसे पक्ष विरोधी घोषित किया। अन्य प्रत्यक्षदर्शी साक्षी ने अपनी मुख्य परीक्षा में आहत के संपूर्ण कथनों की पुष्टि की, किंतु अपने प्रतिपरीक्षण में उसने यह स्वीकार किया कि अभियुक्त ने आहत को उठाकर नहीं पटका था अपितु धक्का देकर गिराया था। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि वह उसकी दुकान में नौकर है, किंतु उसने भी साक्षी पक्ष के इस सुझाव से इंकार किया कि उसके गिराने से चोटें आईं।
चिकित्सीय परीक्षण करने वाले चिकित्सक, डॉक्टर ने चिकित्सीय प्रतिवेदन में वर्णित तथ्यों की पुष्टि करते हुए अपने प्रतिपरीक्षण में यह स्वीकार किया कि बाहर से दिखने में कोई अस्थिभंग नहीं था।