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kameshrathore


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त्‍साह की गिनती अच्छे गुणों में होती है। किसी भाव के अच्‍छे या बुरे होने का निश्‍चय अधिकतर उसकी प्रवृत्ति के शुभ या अशुभ परिणाम के विचार से होता है। वही उत्‍साह जो कर्त्‍तव्‍य कर्मों के प्रति उत्‍साह सुन्‍दर दिखाई पड़ता है। वही उत्‍साह कर्मों की ओर होने पर वैसा श्‍लाघ्‍य नहीं प्रतीत होता। आत्‍मरक्षा, पर-रक्षा, देश-रक्षा आदि के निमित्‍त साहस की जो उमंग देखी जाती है उसके सौन्‍दर्य को परपीड़न, डकैती आदि कर्मों का साहस कभी नहीं पहुंच सकता। यह बात होते हुए भी विशुद्ध उत्‍साह के साहस की प्रशंसा संसार में थोड़ी-बहुत होती है। अत्‍याचारियों या डाकुओं के शौर्य और साहस की कथाएं भी लोग तारीफ करते हुए सुनते हैं। अब तक उत्‍साह का प्रधान रूप ही हमारे सामने रहा, जिसमें साहस का पूरा योग रहता है। पर कर्म मात्र के संपादन में जो तत्‍परता पूर्ण आनंद देखा जाता है वह भी उत्‍साह ही कहा जाता है। सब कामों में साहस अपेक्षित नहीं होता पर थोड़ा-बहुत आराम, विश्राम, सुभीते इत्‍यादि का त्‍याग सब में करना पड़ता है और कुछ नहीं तो उठकर बैठना, खड़ा होना 10-5 कदम चलना ही पड़ता है। जब तक आनंद का लगाव किसी क्रिया, व्‍यापार या उसकी भावना के साथ नहीं दिखाई पड़ता तब तक उसे उत्सााह की संज्ञा प्राप्‍त नहीं होती है। अभियुक्‍त भ्राता दिनेश (अभियोजन साक्षी-4) द्वारा संस्थित देहाती नालिशी में उल्‍लेखित तथ्‍यों का समर्थन नहीं किया गया है। यद्यपि देहाती नालिशी प्रदर्श पी-4 पर अपने हस्‍ताक्षर अभिप्रमाणित किए गए हैं। देहाती नालिशी अभिलेख प्रधान आरक्षित भी परिक्षीत नहीं है। वस्‍तुत: साक्ष्‍य सूचि में भी उसका नाम उल्‍लेख नहीं है। दिनेश अभियोजन द्वारा पक्ष विरोधी घोषित किया गया है। और उसके द्वारा देहाती नालिशी (प्रदर्श पी-4) में उल्‍लेखित तथ्यों से प्रत्‍याख्‍यान करते हुए इस तथ्य से प्रत्‍याख्‍यान किया गया कि उसके समक्ष उसके पिता को अभियुक्‍त हेमराज द्वारा कुल्‍हाड़ी से प्रहारित किया गया था। अपने मुख्‍य परीक्षण परिच्‍छेद-1 में उसके द्वारा यह अभिकथन किया गया कि घटना दिनांक को वह बक्‍खर सहित कृषि करने के लिए अपने खेत पर गया था और खेत पर ही उसे सूचना प्राप्‍त हुई थी कि उसके पिता की किसी व्‍यक्ति द्वारा मृत्यु कारित की गई है। अत: वह अपने निवास गृह पहुंचा था और अपने पिता के पैर कटे हुए और पिता को मृत अवस्था में दृष्टिपात किया गया था। इसी परिच्‍छेद में उसके द्वारा यह अभिकथन किया गया कि उपस्थित व्‍यक्तियों द्वारा यह प्रगट किया गया था कि उसके पिता की मृत्‍यु उसके भ्राता अभियुक्‍त द्वारा की गई है। देहाती नालिशी में उल्‍लेखित अभियुक्‍त के भांजे देवकरण एवं सरपंच विक्रम सिंह को अभियोजन द्वारा परिक्षित नहीं किया गया है। यद्यपि चौकीदार और पटेल पदम सिंह को परिक्षित किया गया है।
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