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ोस्वामी तुलसीदास महान समाज सुधारक थे। उन्होंने समाज में अनेक उच्च आदर्शों की स्थापना की। जीवन के हर क्षेत्र में उन्होंने आदर्श स्थापित किये। पारिवारिक जीवन में माता, पिता, गुरु, पति, पत्नी, भाई और स्वामी आदि के प्रति जो कर्त्तव्य होता है सभी का आदर्श रूप उनके रामचरित मानस में देखा जा सकता। है भगवान राम को उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में चित्रित किया है। गोस्वामी तुलसीदास के काव्य की प्रशंसा करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। उनका रामचरित मानस तो भारतीय जनजीवन का प्राण तत्व है। इसीलिए आज सैकड़ों वर्षों के बाद भी तुलसी जनता के पथ प्रदर्शक बने हुए हैं। उनको हिंदी साहित्य का 'सूर्य' कहा जाता है। उनकी प्रतिभा-किरणों से केवल हिन्दू समाज और भारत, बल्कि समस्त संसार आलोकित हो रहा है। नोबल पुरस्कार विजेता महान भारतीय कवि रबिन्द्रनाथ टैगोर की जन्म की वर्षगांठ को प्रत्येक वर्ष रबिन्द्रनाथ टैगोर जयंती के रूप मेँ मनाया जाता है। 'टैगोर जयंती' हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार प्रति वर्ष बैसाख माह के 25वें दिन मनायी जाती है। अंग्रेज़ी कैलेण्डर के अनुसार यह प्रति वर्ष मई माह की 8वीं या 9वीं तारीख को पड़ती है। रबिन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कलकत्ता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। उनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था। ये देवेन्द्रनाथ टैगोर के सबसे छोटे पुत्र थे। इनके परिवार के लोग सुशिक्षित और कला-प्रेमी थे। रबिन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा अधिकाँश घर पर हुई थी। इनको वकालत पढने के लिए इंग्लैंड भेजा गया। वहाँ एक साल ठहरने के पश्चात वह भारत वापस गए। घर के शांतपूर्ण वातावरण में इन्होने बँगला भाषा में लिखने का कार्य आरम्भ कर दिया और शीघ्र ही प्रसिद्धि प्राप्त कर ली। रबिन्द्रनाथ टैगोर ने साहित्य, शिक्षा, संगीत, कला, रंगमंच और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अनूठी प्रतिभा का परिचय दिया। अपने मानवतावादी दृष्टिकोण के कारण वह सही मायनों में विश्वकवि थे। वे 'गुरुदेव' के नाम से लोकप्रिय हुए। गुरुदेव के काव्य के मानवतावाद ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई। दुनिया की तमाम भाषाओं में आज भी टैगोर की रचनाओं को पसंद किया जाता है। वे चाहते थे कि विद्यार्थियों को प्रकृति के सानिध्य में अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने इसी सोच को मूर्त रूप देने के लिए शांतिनिकेतन की स्थापना की। रबिन्द्रनाथ टैगोर ने अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, चीन सहित दर्जनों देशों की यात्राएँ की थी। 7 अगस्त 1941 को देश की इस महान विभूति का देहावसान हो गया। श्री टैगोर दुनिया के अकेले ऐसे कवि है, जिनकी दो कृतियां, दो देशों की राष्ट्रगान बनीं। भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता..' और
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