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kishorepathade
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बिटकॉइन जिसे क्रिप्टोकरेंसी या वर्चुअल मुद्रा भी कहा जाता है, के पीछे न तो किसी केन्द्रीय बैंक का समर्थन है और न ही भौतिक परिसम्पत्तियों का। बीस हजार डॉलर के ऐतिहासिक आँकड़ों को छू लेने वाले बिटकॉइन की कहानी सच में काफी रोचक है। दरअसल सभी लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि बिटकॉइन के मूल्यों में आगे और वृद्धि होगी। ऐसे में आपूर्ति कम और माँग अधिक होने के कारण इसके मूल्यों में वृद्धि स्वाभाविक ही है। बिटकॉइन अनेक बार गिरा, परंतु पुन: संभल कर बढ़ता रहा। पिछले वर्ष पूरी दुनिया में इन्टरनेट पर बिटकॉइन से संबंधित सामग्री सबसे ज्यादा सर्च की गई। भारत में बिटकॉइन के नाम पर ठगी के मामले भी हैं जो बड़ी संख्या में दर्ज हुए। लोग भारी मात्रा में बिटकॉइन खरीदने के चक्कर में फर्जी बेवसाइटों के शिकार हुए। इसके अतिरिक्त बिटकॉइन के नाम पर जल्द पैसा दुगना करने अथवा भारी रिर्टन देने के दावे करने वालों की बहार रही। एक तरह से जब मुख्य मीडिया में बिटकॉइन पर भारी चर्चा थी, उसी का लाभ ठग उठा रहे थे। बिटकॉइन के मामले में लोगों में जागरूकता की सख्त आवश्यकता है। जागरूकता की कमी के कारण ही दिल्ली में ठगों ने आभासी मुद्रा बिटकॉइन के पीतल के सिक्के सैकड़ों की संख्या में तीन से दस लाख प्रति सिक्कों की दर से बेच डाले। बिटकॉइन माइनिग व जटिल प्रक्रिया है। इसके चलते कम आपूर्ति एवं भारी माँग की स्थिति बनती रहती है। तीन जनवरी 2009 को जब बिटकॉइन जारी किया गया था तब दुनिया 2008 की आर्थिक मंदी से जूझ रहा था। उस समय वैश्विक वित्तीय संस्थाओं की विफलता की प्रतिक्रिया में बिटकॉइन जैसी मुद्राओं की नींव रखी गई। अपने प्रारंभिक दिनों में बिटकॉइन जहाँ केवल काले धन, हवाला, फिरौती, ड्रग्स सिडिकेट इत्यादि से जूझ रहा था। वहीं वर्तमान में वेनेजुएला, जिम्बावे इत्यादि देशों में लोगों की मुद्रास्फीति से सुरक्षा कर रहा है। बिटकॉइन समर्थन आर्थिक विशेषज्ञ तो अब उत्साहित होकर अब हाइपर बिटकॉइन ऑर्गनाइजेशन की अवधारणा दे रहे हैं। इसके अनुसार बिटकॉइन इतना कीमती और महत्वपूर्ण हो जाएगा कि दुनिया की अन्य करेंसी इस पर ही निर्भर हो जाएगी। सामान्य शब्दों में कहें तो यह डॉलर का स्थान ले लेगा। दुनिया भर में बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी की सफलता से उत्साहित होकर कई देश अपनी क्रिप्टोकरेंसी अपना रहे हैं। बिटकॉइन ने पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के सीढि़यों से ऊँचाई पर पहुँचकर पुन: पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के स्थापित नियम-कानूनों को भरपूर चुनौती दे रहा है।