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deepakgaykwad1531495


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ुझे हमेशा वो दिन याद रहता है कि कैसे मैं सुबह को जल्‍दी उठने, तरोताजा होने, नहाने, नाश्‍ता करने और स्‍कूल जाने के लिए बहुत अधिक उत्‍साहित था। मेरी माता जी स्‍कूल में मेरे पहले दिन के लिए थोड़ी सी चिन्तित भी थी। इसका कारण्‍ा यही था कि मैं थोड़ा शरारती और आलसी था। उन्‍होंने मुुुुझे सिखाया कि कैसे सभी चीजों को सही समय पर किया जाता हैं। रात को मैं अपने कमरे में आया और दरवाजा बंद कर लिया। मुझे आज भी याद है कि मैं पूरी रात सोया नहीं था। मैने स्‍कूल के कपड़े, जूते पहनने शुरू ि‍किए और कंधो पर अपना स्‍कूल बैग टॉंग लिया। मैं सोचता रहा कि मैं स्‍कूल जाते समय कैसा लगूँगा आदि। रात बीती और सुबह हो गई। आसमान में चिडि़यों के चहचहाने की मधुर ध्‍वनि आने लगी। सूरज चमक रहा था और मुझ खिड़की से सूर्य का प्रकाश पड़ रहा था। मेरी माताजी कमरे में आई और उन्‍होंने मुझे अपनी प्‍यारी बोली में उठाने की कोशिश की। तभी मैं अपनी ढकी हुई चादर से बाहर गया और अपनी माताजी को चकित कर दिया मैं स्‍कूल बस में अपनी माताजी के साथ स्‍कूल गया और अपने मित्रों एवं अध्‍यापकों से मिला मुझे मेरी कक्षा अध्‍यापक कक्षा में ले गई और मेरी माताजी ने बाहर बगीचे में अन्‍य माताओ की तरह इंतजार किया। मैं अपनी कक्षा में बहुत ही शांत था, पर मैंने बहुत से बच्‍चों को अपनी माताओं के लिए रोते हुए सुना। जब मेरी कक्षा अध्‍यापक का आगमन हुआ तो उन्‍होंने दरवाजा बंद कर दिया और स्‍मार्ट बोर्ड पर हमें कुछ बेहद रोचक कहानियों के बारे में बताया। यह ही नहीं, हमने कई नयी बाते भी सीखी। इससे सभी खुश हो गये। तब अध्‍यापिका ने हमसे हमारे बारे में पुछा और हमें अपना नाम भी बताया। उन्‍होंने हमसे कहा कि हम अच्‍छे बच्‍चे हैं और हमें नियमित रूप से अपनी माताओं को याद किए बिना आना पड़ेगा। वो बहुत ही प्‍यार से बोल रही थी। और सभी के साथ बहुत अच्‍छे से व्‍यवहार कर रहीं थी। उन्‍होंने हमसे कहा कि यदि हम स्‍कूल प्रतिदिन आऐंगे तो वो हमें कहानी सुनाया करेंगी। हम सभी अपनी-अपनी माताओं के साथ घर गए।
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