words per minute
11
kishorepathade
00:00
Speed
आज के युग में प्रदूषण नियंत्रण एक बहुत विशाल समस्या के रूप में हमारे सामने हैं जिससे निपटने का हर भरसक प्रयास, हम हर स्तर पर कर रहें है। वो चाहे पीने का पानी हो, खेती के लिए जमीन हो, या फिर बहती हवा हो, प्रदूषण ने हर जगह अपने पैर पसार लिए हैं। जिसकी वजह से हम चाहे किसी भी उम्र में क्यों ना हों, हम में से ज्यादातर लोग किसी ना किसी बीमारी से जरूर ग्रसित है, जिसका सीधा कारण प्रदूषण है। हालांकि बीते वर्षों में वैश्विक स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं, जिनमें सौर ऊर्जा ने सबसे प्रत्यक्ष संकेत दिखाए हैं। किसी भी देश को अपने विकास की गति को बरकरार रखने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है, जिस ऊर्जा को पैदा करने के लिए काफी प्राकृतिक संसाधनों की जरूरत होती है, जो कि विपुल पैमाने पर प्रदूषण करते हैं। लेकिन जब इसी ऊर्जा की भरपाई हम सौर ऊर्जा की मदद से करने लगते है तो इससे प्रदूषण में काफी हद तक गिरावट आ जाती है। अगर हम भारत की ही बात करें तो डाटा के हिसाब से बीते तीन सालों में भारत में सौर ऊर्जा का उत्पादन अपेक्षित क्षमता से चार गुना ज्यादा किया गया है जो की अपने आप में एक उपलब्धि है। दुनिया में अमेरिका और चीन के बाद बिजली की सबसे ज्यादा खपत भारत में होती हैं, हालांकि भारत में आज भी 30 मिलियन से ज्यादा लोग बिजली की सुविधा से वंचित है। अगर भारत में सौर ऊर्जा के भविष्य की बात करें तो दिन-बा-दिन इसकी मांग शहरी के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी काफी ज्यादा हो रही है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि 2035 तक भारत में सौर ऊर्जा की मांग सात गुना तक वृद्धि हो सकती है यही वजह है कि सौर ऊर्जा की कई विदेशी कंपनियों की निगाहें अब भारत पर टिकी हुई है। अगर वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के उत्पादन की बात करें तो भारत सालाना 8, 727 मेगावाट के उत्पाद के साथ छठे स्थान पर है। पहले तो सिर्फ घरेलू जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब स्ट्रीट लाईट, सरकारी कार्यालय और परिवहनों में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू हो चुका है। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए लोगों को जागरूक कर रही है। शहर के साथ-साथ गांवों में भी खेती में इसका भरपूर इस्तेमाल हो रहा है जिसे देखते हुए केन्द्र सरकार ने सोलर पैनल लगाने के अभियान को प्रोत्साहन देने के लिए अपनी वित्तीय सहायता को पांच सो कोटि से 10 गुना कर पांच हजार कोटि करने का फैसला किया है।