words per minute
27
ManojRawat1418602
00:00
Speed
सुप्रीम कोर्ट के जजों में मतभेद को सुलझाने के लिए रविवार को वकीलों के संगठनों और जजों के बीच दिनभर बातचीत का दौर चला। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस एसए बोबड़े और नागेश्वर राव ने सीजेआई दीपक मिश्रा पर सवाल उठाने वाले सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सीनियर जज जस्टिस जे चेलमेश्वर से मुलाकात की।
इससे पहले जस्टिस चेलमेश्वर से बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में बार काउंसिल के सात सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने उनके आवास पर करीब 45 मिनट तक इस मुद्दे पर चर्चा की। बार काउंसिल ने जस्टिस आरके अग्रवाल सहित सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों से भी अलग-अलग बातचीत की। यह सिलसिला देेेर शाम तक जारी रहा। बता दें कि बीसीआई ने शनिवार को निर्णय लिया था कि एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को सुप्रीम कोर्ट के जजों से मिलेगा जिससे कि जल्द संकट को हल किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन जस्टिस पीबी सावंत सहित चार रिटायर्ड जजों ने सीजेआई दीपक मिश्रा के नाम खुला पत्र लिखा है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के उठाए गए सवालों का समर्थन किया गया है। रिटायर्ड जजों ने कहा कि बेंच बनाने और सुनवाई के लिए मुकदमों का बंटवारा करने के सीजेआई के विशेषाधिकार को और ज्यादा पारदर्शी बनाने की जरूरत है। हाल के महीनों में चीफ जस्टिस प्रमुख मुकदमों को सीनियर जजों की बेंच को भेजने की बजाय अपने चहेते जजों को भेजते रहे हैं। बेंच बनाने, खासकर संविधान पीठका गठन करने में भी सीनियर जजों की उपेक्षा की जाती रही है। पत्र में कहा गया है कि सीजेआई खुद इस मामले में पहल करें और भविष्य के लिए समुचित और पुख्ता न्यायिक व प्रशासनिक उपाय करें। पत्र में दिल्ली हाईकोर्ट के पूूूूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह, मद्रास हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस के चंदू और बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एच सुरेश के नाम है।
दिल्ली डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन (डीडीबीए) ने कहा कि यदि इस मामले का हल 7 से 10 दिनों में नहीं होता, तो हम देश के सभी बार एसोसिएशनों की बैठक बुलाकर चिचार-विमर्श करेंगे और लोगों को जागरूक करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे। डीडीबीए की कोआर्डिनेशन कमेटी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह विवाद सुलझाने के लिए स्वयं ही तंत्र बनाना चाहिए। कमेटी ने कहा कि चीफ जस्टिस को इन मामलों को पहले ही देख लेना था। उन्हें चीजों को संभालने के िलिए बैठक बुला लेनी चाहिए थी। जजों को भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करनी चाहिए थी।