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MaheshSharma4338
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सरकार के चुनावी चंदे को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार नियंत्रित करने के के लिए इलेक्टोरल बॉन्डस की शुरुआत की है। मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के मामले में सरकार का कदम बेअसर ही साबित होगा। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि ये इलेक्टोरल बाॅन्ड, स्टेट बैंक आॅफ इंडिया से खरीदे जाने की व्यवस्था की गई है। बॉन्ड खरीदते समय स्टेट बैंक खरीदार से उसकी पूरी जानकारी हासिल करेगा। इसके बाद व्यक्ति को चाही गई रकम का बॉन्ड दे दिया जाएगा जिसे वह जिस राजनीतिक दल को चाहे, उसे दे सकता है। इस बॉन्ड पर न देने वाले और न ही लेने वाले का जिक्र किया जाएगा। वास्तव में यह एक किस्म की मुद्रा की तरह की कहा जा सकता है। इसमें पारदर्शिता कहाँ है, यह बात समझ में नहीं आती। बताया गया है कि बॉन्ड खरीदने वाले की जानकारी बैंक बैलेंस शीट में होगी कि फला व्यक्ति या फला संस्थान या कम्पनी ने निर्धारित राशि के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं। ये बॉन्ड किसे दिए गए या दिए जाने हैं, इस बात की जानकारी कहीं नहीं होगी। प्रावधान है कि जिस किसी भी राजनीतिक दल को ये बॉन्ड दिए जाएंगे, वह केवल चुनाव आयोग को ही जानकारी देगा। कि उसे निर्धारित राशि के इलेक्टोरल बॉन्ड मिले हैं उसे किसने दिए है ये बॉन्ड, इस बात को भी गुप्त ही रखा जाएगा। जरा सोंचे कि ऐसे में पारदर्शिता की स्थति होगी। सरकार के इस नए कदम के मुकाबले पारदर्शिता को पुरानी व्यवस्था में ही अधिक थी। तब कम्पनी अधिनियम मे प्रावधान था कि जो कम्पनी राजनीतिक दल को चंदा देती, उसे तीन साल तक मुनाफा कमाना होता था। वह मुनाफे का साढ़े सात फीसदी तक चंदा दे सकती थी। घाटे में चलने वाली कम्पनी चंदा नहीं दे सकती थी। लेकिन, अब ये बाध्यताएं समाप्त कर दी गई हैं। पहले कंपनी या संस्थान जिस राजनीतिक दल को चंदा देती थी, उसे उस राजनीतिक दल का नाम बताना होता था। अब यह प्रावधान भी हटा दिया गया है। यह तो सभी मानते हैं कि अनामिकता और पारदर्शिता परस्पर विपरीत स्थितियां हैं लेकिन हमारे देश के वित्त मंत्री कह रहे हैं कि इन बॉन्डस में अनामिकता है इसलिए यह पारदर्शी व्यवस्था है। इलेक्टोरल बॉन्डस की खरीद फरोख्त के सन्दर्भ में स्पष्ट किया गया है कि केवल स्टेट बैंक को ही पता रहेगा कि किसने बॉन्ड खरीदा है क्योंकि उसके पास ही खरीदार की पूरी जानकारी होगी। लेकिन, क्या स्टेट बैंक भारतीय रिजर्व बैंक को यह सूचित नहीं करेगा कि किसने बॉन्ड खरीदे? इससे तो कोई इन्कार नहीं करेगा कि रिजर्व बैंक की सूचना वित्त मंत्रालय तक भी पहुँचेगी।