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ShriyankOmar


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मस्‍या किस क्षेत्र में नहीं है पर इच्‍छाशक्ति और संकल्‍प के अभाव में कई बार लोग इन समस्‍याओं का सामना करने के बजाए इनको सहन करने लग जाते हैं। आवश्‍यक नहीं कि ऐसी सोच सिर्फ वही लोग रखते हैं जिनके पास इन समस्‍याओं से निपटने को शक्ति या क्षमता नहीं होती, बल्कि कभी-कभी क्षमतावान लोग भी विशेष लाभ के दृष्टिगत कुछ समस्‍याओं को बनाकर रखते हैं। आजादी के बाद से काला धन, भ्रष्‍टाचार और कश्‍मीर को समस्‍या इन्‍हीं चुनिंदा समस्‍याओं को बचाकर रखते है। इन समस्‍याओं का निदान यदि सरकारें चाहतीं तो निश्चित रूप किया जा सकता था लेकिन समय के साथ-साथ इन्‍हें और विकराल रूप दे दिया गया। ऐसे में यदि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक भाषण में कांग्रेस पर यह आरोप जड़ा कि अटकाना, लटकाना और भटकाना कांग्रेस की कार्यशैली रही है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं। लगभग सात दशकों के लम्‍बें शासन काल में निश्चित रूप से कांग्रेस की सरकारों नें अनेक समस्‍याओं को राजनीतिक फायदे के लिए जिंदा रखा जिसका परिणाम देश देशवासियों को अब तक भुगतना पड़ रहा है। आज हम किस समाज में जी रहे हैं? विदेशी अंधानुकरण इतना प्रभावी हो चला है कि सारी मर्यादाएं पार हो गई हैं। इंसानों में जिस कदर विकृति हावी हो रही है, उसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं के पीछे फिल्‍म, मोबाइल और इंटरनेट का भी हाथ है। समाज में युवा भ्रमित हो चुके हैं, ऐसे युवाओं की मानसिकता बदलने की जरूरत है। इसके लिए समाज को मिलकर काम करना होगा।
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