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ShriyankOmar
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पिछले दिनों यह बात सामने आयी कि समृद्ध यूरेनियम बनाने सम्बन्धी अनुसन्धान को इसलिए उत्साहित नहीं किया गया क्योंकि भविष्य में हमारा नाभिकीय विद्युत कार्यक्रम प्राकृतिक यूरेनियम का ही उपयोग करेगा। इस प्रकार के अनुसन्धान के विषय में मतभेदों की चर्चा थी लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि हमारे वैज्ञानिक भी इस बात पर एकमत नहीं है कि भविष्य में किस यूरेनियम ईंधन को नाभिकीय केन्द्रों में इस्तेमाल किया जाए।
“यूरेनियम क्या है?” इस संदर्भ में सर्वप्रथम हम यह देखें कि प्राकृतिक यूरेनियम एवं समृद्ध यूरेनियम क्या है। यूरेनियम प्राकृतिक रूप में हमें आक्साइड के रूप में मिलता है और इसमें यूरेनियम 235 एवं यूरेनियम 230 पाये जाते हैं। प्राकृतिक रूप में पाये जाने वाले यूरेनियम 235 लगभग 0.07 प्रतिशत तथा शेष यूरेनियम 238 होता है। यूरेनियम 235 ही प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाला एकमात्र ऐसा तत्व है जिसे नाभिकीय विखण्डन में उपयोग में लाकर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। यदि प्राकृतिक यूरेनियम में यूरेनियम 235 की मात्रा बढ़ाई जाए जो नाभिकीय विद्युत बनाने में ईंधन के रूप में काम आ सकें तो इसे यूरेनियम समृद्धिकरण कहते हैं। कई बार यूरेनियम 238 को कृत्रिम तत्व प्लूटोनियम 239 में बदला जाता है जिसे नाभिकीय केन्द्रों में काम में लाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में स्पष्टता यूरेनियम 235 मात्रा को अधिक करना होता है। तारापुर नाभिकीय केन्द्र के लिए हम जिस समृद्ध यूरेनियम का आयात कर रहे हैं उसमें यूरेनियम 235 की मात्रा 2.7 प्रतिशत होती है।