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SandeepUpadhyay2568
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हर वर्ष 21 मार्च को पारसियाेें द्वारा पारसी नव वर्ष नवरोज मनाया जाता है। सभी पारसी उत्सव में सम्िमलित होते हैं और आनंद मनाते हैं। हम नही जानते कि इस उत्सव की शुरूआत कैसे हुई लेकिन इतिहास बताता है कि यह पहली बार ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी में मनाया गया जब फारसी साम्राज्य पर साइरस और डैरियस का शासन था। हालाकि महान फारसी कवि फिरदौसी अपने शाहनामा में लिखते हैं कि इस उत्सव की शुरूआत राजा जमशेद द्वारा बसंत के आगमन का जश्न मनाने के लिए की गई थी। यही कारण है कि पारसी इसे जमशेदी नवरोज कहते हैं। इस उत्सव की तैयारी बहुत दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। पारसी अपने घरों को साफ करते हैं और उन्हे गुलाब और जास्मिन के फूलों से सजाते हैं। रंगीन पाउडर से ज्यामितीय आकार के या मछलियों, चिडियों और सितारों के आकार के खूबसूरत डिजाइन बनाए जाते हैं। भोजन पारसी उत्सवों का महत्वपूूूर्ण भाग होता है। पारसी भोजन पश्चिम एशियाई और मांसाहरी भारतीय पकवानों का स्वादिष्ट मिश्रण होता है। नवरोज की सुबह पूरा परिवार निकटतम अग्नि मंदिर मे जाता है जहां पुजारी जश्न- ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त्ा करते हैं। प्रत्येक सदस्य पवित्र कपड़़े पहनते हैं। बच्चे बहुत उत्साहित रहते हैं। प्रार्थना करते समय बच्चे सोने और चांदी की जरी वाली छोटी गोल टोपी और आदमी काले मखमल की टोपी पहनते हैं तथा महिलाएं साड़़ि़या से अपने सिर को ढक्कर रखती हैं। प्रार्थना के बाद पारसी एक दुसरे को गले लगाते हैं और साल मुुुुबारक कहते हैं। लोगों के यहां आने-जाने और दोस्तों तथा रिश्तेदारों के साथ उपहारों के आदान-प्रदान में दिन व्यतीत किया जाता है। पारसी घरों में मेहमानों को कुमकुम और अक्षत रखा जाता है। प्रत्येक मेहमान पर मुक से गुलाब जल का छिड़काव किया जाता है। दोपहर के भोजन के समय, खासतौर से तैयार किये गये भाेजन का आनंद लेते के लिए पूरा परिवार इकट्ठा हाेेेता है। उन कम भाग्यशाली लोगों को भोजन भी दिया जाता है जो उत्सव को ठीक तरह से नही मना पाते। गरीबों को भोजन और कपड़े देने के कार्य में बच्चे भी हिस्सा लेते हैं जिससे वे गरीबों की मदद करने की पारिवारिक परंपरा शुुुरू से ही सीखते हैं।