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SandeepUpadhyay2568
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सुप्रीम कोर्ट में जारी संकट के बीच नवगठित पांच जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को आधार की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के मामले में सुनवाई शुरू की। जस्टिस डीवास चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या आधार केवल वेरिफिकेशन और ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा? क्या आधार सुरक्षित है? उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार बता सकती है कि बायोमैट्रिक का इस्तेमाल सोशल वेलफेयर स्कीमों में लीकेज को रोकने के लिए किया जाएगा? कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार सुरक्षित है अगर बायोमैट्रिक्स का इस्तेमाल सिर्फ उसी उद्देश्य से किया जाये, जिसके लिए इसे संग्रहित किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर क्यों राज्य यह कह रहे हैं कि समाज कल्याण के कार्यक्रमों में जो लीकेज है उसे रोकने के लिए सीकरी और जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या आधार बायोमैट्रिक सिस्टम यूएस वीजा के बोयोमैट्रिक्स से अलग है? जजों ने पूछा कि जो डाटा 2009 से 2016 के बीच कलेक्ट किए गए (जब आधार के लिए कोई कानून नहीं था) क्या उन्हें नष्ट किया जा सकता है? याचिकाकर्ताओं की तरफ से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि ऐसा नहीं किया गया था अब उसे खत्म कर दिया जाए। इस मामले में 27 याचिकाएं दाखिल है। सुनवाई अभी जारी है। बता दें कि पिछले 15 दिसंबर काे याचिकाकर्ताओं ने आधार के डेटा लीक और डेटा प्रोटेक्शन पर सवाल उठाए थे। जिसके बाद संवैधानिक पीठ ने बैंक खातों और मोबाइल नंबर सहित दूसरी सेवाओं और योजनाओं के साथ आधार नंबर को जोड़ने की सीमा 31 दिसंबर से बढ़ा कर 31 मार्च 2018 तक कर दी थी।
संवैधानिक बेंच की क्यों पड़ी जरूरत
इसकी वजह 50 और 60 के दशक में आए सुप्रीम कोर्ट के दो पुराने फैसले हैं जो इस मामले में एक-दूसरे के विरूद्ध नजर आते हैं। एम पी शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट की आठ जजों की बेंच कह चुकी है कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है और खड़क सिंह मामले में छह जजों की बेंच का भी यही निष्कर्ष था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट की ही छोटी बेंचों ने कई मामलों में निजता की मौलिक अधिकार बताया। इसलिए नौ जजों की बड़ी बेंच अब पूरे मसले पर विचार कर रही है।