words per minute

27

ManojRawat1418602


00:00

Speed

अदालत के दरवाजे पर वही जा सकता है जिसके पास खूब पैसा हो अदालत का कोई कार्य ऐसा नहीं जो सस्‍ते में हो सकता है। जिन स्‍टाम्‍प पेपरों पर मामले लिखे सुने जाते हैं उनके दाम से लेकर सब इतना मंहगा सौदा है कि आम आदमी घर लुटाकर भी पूरा नहीं कर सकता है। वकीलों की फीस और कोर्ट कचहरी के चक्‍कर लगाते-लगाते आदमी अपनी अवस्‍था तक पार कर जाता है और जबान से वृद्ध हो जाता है। पर न्‍याय प्रक्रिया से गुजरकर न्‍याय के सम्‍बन्‍ध में आश्‍वस्‍त नहीं हो पाता। अभी कुछ दिन पहले की बात है कि न्‍याय करने वाले न्‍यायाधीश भी न्‍याय की मांग करने लगे हैं, और उन्‍हें वेतन भत्‍तों के खिलाफ राज्‍य-सरकार के विरुद्ध हड़ताल पर जाना पड़ा और न्‍याय की प्रतीक्षा करने के लिए मंहगी है, बल्कि वह इतनी लम्‍बी है कि वादी को न्‍याय मिलते-मिलते अपना सब कुछ लुटा देना पड़ता है। विधि एवं न्‍याय मन्‍त्री का यह मत हो सकता है कि सरकार के पास अभी इतना पैसा नहीं है कि आम आदमी को सस्‍ता और सुलभ न्‍याय आसानी से दिला सकें।
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 231 - English

words per minute