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RakhiSoni
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साथियों, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपना आदेश देकर पुन: पुरानी सरकार को बहाल करके यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय न्याय प्रणाली चुस्त दुरुस्त और सर्वोपरि है। यह बात और है कि दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहा है। परन्तु देर रात 48 घण्टे की अवधि उपरांत श्रीपाल ने अपनी कुर्सी पुराने मुख्यमंत्री को खाली कर दी है और वे अब अकेले रह गये हैं। पहले वे राज्य मंत्री मण्डल में परिवहन मंत्री थे और उनका दर्जा केबिनेट मंत्री का था परन्तु अब वे एक साधारण विधायक रह गये हैं। सबसे दुखदायक बात तो यह है कि उनके बारह साथी मंत्री पद पर आसीन होने के लिए उन्हें छोड़कर अपनी पुरानी सरकार में वापिस चले गये। यही नहीं उनका कहना है कि हम पाल के प्रपोगंडा में शामिल नहीं थे हम तो कल्याण सिंह जी के साथ थे और हमने अपनी उपस्थिति राजभवन में राज्यपाल के सामने अपनी सरकार के समर्थन में दी थी। वैसे श्री कल्याण सिंह पुराने भाजापायी हैं, उनकी अपनी सूझबूझ है और उनके कार्यों का समर्थन भाजपा शीर्ष भी करता है। और वे उत्तरप्रदेश के मामलों में निर्णय लेने हेतु पूर्ण रूप से स्वतंत्र एवं सक्षम हैं। आपने पहले सुना होगा कि इसके पूर्व भी केन्द्र ने उन्हें हटाने की साजिश की थी परन्तु राष्ट्रपति ने केन्द्र को पुन: निर्णय पर विचार करने के लिये बाध्य किया था। उसी के उपरांत श्री कल्याण सिंह मुख्य मंत्री बने थे।