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gauravtiwari1397033


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1950 से 15 अक्‍टूबर, 1989 तक निर्वाचन आयोग एक सदस्‍यीय निकाय के रूप में कार्य करता था जिसमें केवल मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी होता था, जिसमें केवल मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी होता था। मत देने की न्‍यूनतम आयु 21 से 18 वर्ष करने के बाद 16 अक्‍टूबर, 1989 को राष्‍ट्रपति ने आयोग के काम के भार को कम करने के लिए दो अन्‍य निर्वाचन आयुक्‍तों को नियुक्‍त किया। इसके बाद, आयोग बहुसदस्‍यीय संस्‍था के रूप में कार्य करने लगा, जिसमें तीन निर्वाचन आयुक्‍त है। हालांकि 1990 में दो निर्वाचन आयुक्‍तो के पदों पर को समाप्‍त कर दिया गया और स्थिति के बारे में पहले की तरह हो गई। एक बार फिर अक्‍टूबर स्थिति एक बार पहले की तरह हो गई। एक बार फिर अक्‍टूबर 1993 में दो निर्वाचन आयुक्‍तों को नियुक्‍त किया गया। इसके बाद से अब तक आयोग बहुसदस्‍यीय संस्‍था के रूप में कार्य करने लगा, जिसमें तीन निर्वाचन आयुक्‍त हैं हालांकि 1990 में दो निर्वाचन आयुक्‍तों को नियुक्‍त किया गया। इसके बाद से अब तक आयोग बहुसदस्‍यीय संस्‍था के तौर पर काम कर रहा है, जिसमें तीन निर्वाचन आयुक्‍त हैं। मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त दो अन्‍य निर्वाचन आयुक्‍तों के पास सामने शक्तियाँ होती हैं तथा उनके वेतन, भत्‍ते दूसरे अनुलाभ भी एक-समान होते हैं जो सर्वोच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीा के सामन होते हैं। ऐसी स्थिति में जब मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त दो अन्‍य निर्वाचन आयुक्‍तों के बीच विचार में मतभेद होता है तो आयोग बहुमत के आधार पर निर्णय करता है। उनका कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो तक होता है। वे किसी भी समय त्‍यागपत्र दे सकते हैं। या उन्‍हें कार्यकाल समाप्‍त होने से पूर्व भी हटाया जा सकता है। संविधन के अनुच्‍छेद-324 में चुनाव आयोग के स्‍वतंत्र निष्‍पक्ष कार्य करने के लिए निम्‍नलिखित उपबंध है: मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त की अपनी निर्धारित पदावधि में काम करने का सुरक्षा है। मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त हो उसके पद से उसी रीति से अन्‍य उन्‍हीं आधाारों, पर ही हटाया जा सकता है। जिस रीति के आधार पर न्‍यायालय में हटाया जाता है। जिस रीति अन्‍यथा नहीं। दूसरे शब्‍दों से, उन्‍हें दुर्व्‍यवहार या असमक्षता से नहीं आधार पर के दोनों संदनों के प्रतिवेदन को आधार मनाया जा सकता है हालाकि यह राष्‍ट्रपति द्वारा हस्‍तक्षेप किया जा सकता है मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त की सेवा की शर्तों मे उसकी नियुक्ति के पश्‍चात उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता। अन्‍य निर्वाचन आयुक्‍त की प्रादेशिक आयुक्‍त को मुख्‍य निर्वाचन की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है। तरह दिशा-निर्देश दिया जा सकता है
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