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NeerajNayak
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क्रिकेट के इस महासंग्राम में क्रिकेट के कई उत्साही खेल प्रेमी अंग्रेजों और आस्ट्रेलियाइयों के प्रभुत्व वाले पूर्व-स्वाधीनता के युग में क्रिकेट के भारतीय ब्रांड की स्थापना में योगदान देने के लिए रंजीत सिंह को भारतीय क्रिकेट का जनक मानते हैं। औपनिवेशीकरण के युग में एक भारतीय की लोकप्रियता की मुख्य वजह उनके खेल में नवीनता और ताजगी का समावेश था। रंजीत सिंह जी ने अपना अधिकतर क्रिकेट इंग्लैंड में खेला और वे इंग्लिश टेस्ट टीम का हिस्सा बन गए थे। उन्हें दौरा कर रही आस्ट्रेलियन टेस्ट साइड के खिलाफ कुछ बेहतरीन पारियां खेलने और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कैम्ब्रिज और ससेक्स टीमों की तरफ से प्रतिनिधित्व करते हुए सबसे अधिक स्कोर करने वाले लगातार उभरते खिलाडि़यों में से एक के रूप में याद किया जाता हैं। इसके अलावा, रंजीतसिंह जी 1900 के आरंभ में ससेक्स में कैप्टन भी बने जो कि औपनिवेशिक शासन में बहुत दुर्लभ था। अपनी विशिष्ट तकनीक और तेज प्रतिक्रिया के साथ, उन्होंने बल्लेबाजी की एक नई शैली का ईजाद किया और इस खेल में क्रांति ला दी। पहले जहा आमतौर पर बल्लेबाज आगे की ओर पुश करते थे, वहीं रंजीत सिंह जी अपने अधिकतर शॉट बैकफुट पर खेलते थे। रंजीत सिंह जी को आधुनिक समय के लेग ग्लान्स या फिलक विकसित करने का श्रेय प्राप्त हैं। देश के प्रमुख फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट 'रणजी ट्रॉफी' का नाम उनके नाम पर ही रखा गया है। आधुनिक समय में, इस उप महाद्वीप के कई बल्लेबाज उन्हीं की शैली में बल्लेबाजी करते हैं, जिसमें शक्ति पैदा करने के लिए फोरआर्म के बजाय कलाईयों का उपयोग किया जाता हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षो में इस खेल में काफी बदलाव आए हैं, फिर भी रंजीत सिंह जी की शैली की महत्ता अब भी निरविवाद हैं, क्योंकि आधुनिक समय के क्रिकेटर रन बनाने के लिए उनके अविष्कार को सबसे विश्वसनीय और सूरक्षित शॉट मानते हैं।