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SanjayKushwaha8677
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सेशन न्यायालय- राज्य सरकार प्रत्येक सेशन खंड के लिए एक सेशन न्यायालय स्थापित करेगी। प्रत्येक सेशन न्यायालय में एक न्यायाधीश पीठासन होगा, जो उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किया जाएगा। उच्च न्यायालय अपर सेशन न्यायाधीशों और सहायक सेशन न्यायाधीशों को भी सेशन न्यायालय में अधिकारिता का प्रयोग करने के लिए नियुक्त कर सकता है। उच्च न्यायालय द्वारा एक सेशन खंड के सेशन न्यायाधीश को दूसरे खंड का अपर सेशन न्यायाधीश भी नियुक्त किया जा सकता है और ऐसी अवस्था में वह मामलों को निपटाने के लिए दूसरे खंड के ऐसे स्थान या स्थानों में बैठ सकता है जिनका उच्च न्यायालय निदेश दे। जहां किसी सेशन न्यायाधीश का पद रिक्त होता है वहां उच्च न्यायालय किसी ऐसे अर्जेंट के जो उस सेशन न्यायालय के समक्ष किया जाता है लंबित है अपर या सहायक सेशन न्यायाधीश द्वारा अथवा यदि अपर या सहायक सेशन न्यायाधीश नहीं है तो सेशन खंड के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा निपटाए जाने के लिए व्यवस्था कर सकता है और ऐसे प्रत्येक न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को ऐसे आवेदन पर कार्यवाही करने की अधिकारिता होगी। सेशन न्यायालय समान्यत: अपनी बैठक ऐसे स्थानों पर करेगा जो उच्च न्यायालय अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे किंतु यदि किसी विशेष मामले में सेशन न्यायालय की यह राय है कि सेशन खंड में किसी अन्य स्थान में बैठक करने में पक्षकारों और साक्षियों को सुविधा होगी तो वह अभियोजन और अभियुक्त की सहमति से उस मामले को निपटाने के लिए या उसमें साक्षी या साक्षियों की परीक्षा करने के लिए उस स्थान पर बैठक कर सकता है। स्पष्टीकरण- इस संहिता के प्रयोजनों के लिए ''नियुक्ति'' के अंतर्गत सरकार द्वारा संघ या राज्य के कार्यकलापों के संबंध में किसी सेवा या पद पर किसी व्यक्ति की प्रथम नियुक्ति पद स्थापना या पदोन्नति नहीं है जहां किसी विधि के अधीन ऐसी नियुक्ति पद-स्थापना या पदोन्नति सरकार द्वारा किये जाने के लिए अपेक्षित है। सहायक सेशन न्यायाधीशों को अधीनस्थ होना- सब सहायक सेशन न्यायाधीश उस सेशन न्यायाधीश के अधीनस्थ होंगे जिसके न्यायालय में वे अधिकारिता का प्रयोग करते हैं। सेशन न्यायाधीश, अपनी अनुपस्थिति में या कार्य करने में असमर्थता की स्थिति में, किसी अर्जेण्ट आवेदन के अपर या सहायक सेशन न्यायाधीश द्वारा, या यदि कोई अपर या सहायक सेशन न्यायाधीश न हो तो।