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NeerajNayak


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णतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम राजधानी दिल्ली में होता है विजय चौक पर मंच बना होता है तथा दर्शक दीर्घा होती है राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ यहाँ पधारते हैं और राष्ट्रध्वज फहराते हैं उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है सेना के बैंड राष्ट्रगान की धुन गाते हैं राष्ट्रपति परेड का निरीक्षण करते हैं परेड में विभिन्न विद्‌यालयों के बच्चे, एन.सी.सी. के कैडेट्‌स पुलिस अर्द्धसैनिक और सेना के जवान भाग लेते हैं परेड को देखने नेतागण, राजदूत और आम जनता बड़ी संख्या में आती है इस अवसर पर किसी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है । गणतंत्र दिवस की परेड का दृश्य बहुत आकर्षक होता है सेना और अर्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियाँ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ती हैं परेड के बाद झांकियों का दृश्य सलामी मंच के सामने से गुजरता है एक से बढ्‌कर एक सजी- धजी झाकियाँ किसी में कश्मीर के शिकारे का दृश्य तो किसी में महात्मा बुद्ध की शांत मुद्रा की झलक किसी में महाराणा प्रताप अपने घोड़े चेतक पर नजर आते है तो किसी में रणचंडी बनी लक्ष्मीबाई किसी-किसी झाँकी में नृत्यांगनाएँ नाचती-गाती सबको मंत्रमुग्ध किए चलती हैं विभिन्न राज्य अपनी झाँकी में अपनी संस्कृति को दर्शाते हैं बहादुर बच्चे हाथी या जीप पर सवार होकर बहुत प्रसन्न दिखाई देते है गणतंत्र दिवस के समारोह में राष्ट्रपति देश के निमित्त असाधारण वीरता प्रदर्शित करनेवाले सेना और पुलिस के जवानों को वीरता पुरस्कार एवं पदक प्रदान करते है । गणतंत्र दिवस अपनी उपलब्धियों के मूल्यांकन का दिन है गणतंत्र भारत ने कौन-कौन सी मंजिलें तय कर लो और किन-किन मंजिलों की छूना अभी बाकी है इसकी समीक्षा की जाती है अखबारों और पत्रिकाओं मैं इससे संबंधित अनेक रिपोर्टें छपती हैं टेलीविजन पर रंगारंग कार्यक्रम होते हैं जगह-जगह पर कव्वालियों, मुशायरों और कवि सम्मेलनों की घूम मची रहती है राजधानी की मरकारा इमारतों पर मनमोहक रोशनी की जाती है राष्ट्र अपने गणतंत्र पर गर्व महसूस करता है
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