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DeepakGaykwad1522508
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राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का एक कार्यकर्ता होने के नाते मैं आप के सामने कुछ प्रस्ताव रखना चाहता हूॅँ कि आप उन पर जल्द जल्द अमल करेंगे। आप को यह ज्ञात ही है कि हमारी समिति द्वारा हाल ही में नागपूर में विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया था। जहॉ तक हमारी सरकार की बात हैं हमारे प्रधानंत्री जी ने इसका उदघाटन किया और चार केंद्रीय मंत्री भी उस में शामिल हुए थे। इनके अलावा 30 देशों के लगभग 75 प्रतिनिधियों ने उस सम्मेेेेलन में भाग लिया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उस के स्वागताध्यक्ष थे और 20 संसद सदस्य भी उस समय उपस्थित थे। वहॉ पर उपस्थित सभी देशों के प्रतिनिधियों ने यह मॉंग कि है, कि भारत को अगुआ बन कर यह कोशिश करनी चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को स्थान मिले क्योंकि वह विश्व में सबसे अधिक लोगों की बोलने वाली भाषा हैं। हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थान दिलाने के काम में ये सब से अधिक लोगो की बोलने वाली भाषा हैं। इसलिए मेरी आप से यह नम्र विनती है, कि आप इन सब देशो के साथ सलाह मशविरा करें और उनकी सहायता की मॉंग करें। मुझे यह मालुम हैं, कि उस सम्मेलन में जो लोग आए थें उन में सरकार के प्रतिनिधि के नाते केवल एक राज्य का शिष्टमंडल आया था और बाकी सब लोग गैर सरकारी थे। इसलिए आप कृपया यह भी पता लगाने का प्रयास कीजिए कि उन का मत उन के सरकार का मत के अनुसार है या नही और वे किस रूप में उपस्थित थे। उनका व्यक्तित्व सरकारी या तो गैर सरकारी? मेरी धारणा तो यह बनी हैं कि उस सम्मेलन में उपस्थित तमाम देशों के प्रतिनिधियों के आश्वासन पर कि वे हिंदी भाषा को संयुक्त राष्ट्र संघ में मान्यता दिए जाने के सवाल पर समर्थन करेंगे अब इस बात में ज्यादा कठिनाईं नहीं आयेगी। जहॉं तक हमें मालूूूम हैं राष्ट्र संघ में जिन भाषाओं को स्वीकृति दी हैं, उन्ही में हम वहॉं भाषण दे सकते हैं। हिंदी भाषा को अभी तक राष्ट्र संघ ने मान्यता न देने की वजह से हम वहीं हिंदी में भाषण नहीं दे सकते। इसलिए मेरी प्रार्थना है कि राष्ट्रसंघ की हिंदी को मान्यता प्राप्त करने के लिए आप प्रयत्न करें।
कौशल्या देवी इंस्टीटयुट धार का सीपीसीटी विद्यार्थियों हेतू को सीपीसीटी की संपूर्ण तैयारी करवाने हेतू विशेष प्रयास
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