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atulpathak
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आज हमारे देश में समाज की मिलावट सब से बड़ी शत्रु है। मिलावट तथा मिलावट खोर का चोली-दामन का साथ है। समाज में मनुष्य मिलावट खोर होने की तरफ क्यों बढ़ता है, वह ऐसा क्यों सोचता है, कि मिलावट करनी चाहिये। मनुष्य आदि काल से ही लालच का शिकार है। किन्तु आधुनिक समय में लालच इतना बढ़ गया है कि उसके किसी गलत कार्य से अगर किसी की जान भी चली जाए तो उसको इसकी चिन्ता नहीं, बल्कि उसकी जेब भरनी चाहिए। आज खाने-पीने की हर वस्तु में मिलावट पाई जाती है। दूध में मिलावट, घी में मिलावट, मसालों में मिलावट इत्यादि । मिलावट खोर नकली दवाईयाँ बनाने तथा उसमें मिलावट करने में भी नहीं चूकते जबकि उनको पता है कि उनके इस कार्य से लोगों की जान को खतरा हो जाता है। मिलावट करना एक अपराध है इसे रोकना सरकार का कर्तव्य है। परन्तु इसे रोकने के लिए जो कर्मचारी रखे हुए हैं, वह भी मिलावट खोर का साथ देते हैं। उनसे अच्छी खासी रकम वसूलते हैं। हर शहर में स्वास्थ्य अधिकारी होते हैं, परन्तु वह लोग हर एक से महीने वार पैसा वसूलते हैं। जब बाड़ ही खेतों को खाये तो खेती की रखवाली कौन करे। अभी कुच दिन पहले सन् 1998 में ही, जब दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का शासन था तो सरसों के तोल में इतनी मिलावट हुई, कि काफी लोग इसका शिकार हो गए। दिल्ली के अस्पताल मरीजों से भर गये, सैंकड़ों की जानें चली गई। उस समय तेल 80 रुपये किलो बिक गया। तेल के बनाने वालों ने उस तेल को फैंक दिया। कुछ दिनों के वास्ते उनका तेल बिकना बंद हो गया। सरकार को पैसा चाहिए था। व्यापारियों ने मिलकर पैसा इकट्ठा करके अन्दर-खाने पैसा दे दिया। अब वो ही तेल बाजार में खुले आम सस्ता बिक रहा है। लोगों ने कुछ दिनों खाना बन्द कर दिया था, ऐसा सोचता हूँ कि मिलावट करना एक अपराध है, और दोषी व्यक्ति को सजा-ए-मौत मिलनी चाहिए। मैं यह आशा करता हूँ कि इस अपराध से दूर रहेंगे और मिलावट खोरों का डटकर विरोध करेंगे। रिस्वत लेना एवं देना कानूनी जुर्म है।