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laxmisahu
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गोंडी अब तक बहुत सारी बोलियों का समुच्चय थी। बहुत सी बोलियां हैं, जिन को गोंडी कहते थे, पर उनको बोलने वाले आपस में एक-दूसरे को समझ नहीं पाते थे। भरत में राज्यों का गठन भाषाई आधार पर हुआ था पर गोंडी भाषियों के साथ एक ऐतिहासिक अन्याय हुआ था जब गोंडी बोलने वाले आदिवासी कम से कम छह प्रदेशों में बंट गए। पिछले चार वर्षों से मध्य भारत के गोंड आदिवासी के कुछ दर्जन प्रतिनिधि हर कुछ महीने किसी न किसी जगह मिलते रहे हैं और पिछले हफ्ते उन्होंने अपना पहला मानक शब्दकोष तैयार किया है। आमतौर पर इस तरह के काम सरकार करती है। यह संभवत: पहली बार हुआ है जब एक समुदाय ने साथ आकर अपना मानक शब्दकोष बनाया है। सरकार से भी उनको मदद मिली है। अब गोंडी में पत्रकारिता, एक जैसा शिक्षण ओर प्रशासन का काम किया जा सकेगा। अब उत्तर बस्तर के शिक्षक दक्षिण बस्तर भी जा सकेंगे, जो अब तक नहीं हो पा रहा था। पिछले पखवाड़े दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में मध्य भारत के सात प्रदेशों-मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश तेलंगाना और कर्नाटक से 80 गोंड अादिवासी एक हफ्ते के लिए जुटे और उन्होंने चार साल से चल रहे अपने काम को आखिरी रूप दिया।