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JitendraGuthriya
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देश में बढ़ रही बेरोजगारी को लेकर चिंता की लकीरों युवाओं के चेहरों पर हैं, तो सरकार भी कम चिंतित नहीं है। तेजी से बढ़ती युवा आबादी को रोजगार देना सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है वहीं देश की औसत आयु में बढ़ोतरी के कारण सेवानिवृति की आयु सीमा बढ़ाने की मांग भी तेज होती जा रही है। चिकित्सा सेवाओं में सुधार की बदौलत आज रिटायर होने के बाद भी लोगों के पास काफी लंबा जीवन होता है और उनका स्वास्थ्य भी काम करने लायक रहता है। इसलिए वे चाहते हैं कि उन्हें कुछ और बरस काम करने दिया जाए।
तर्क दिया जाता है कि नए तौर पर नियुक्त लोगों को काम करने योग्य बनाने से पहले प्रशिक्षित करने की जरूरत होती है। जबकि सेवारत लोग पहले से प्रशिक्षित होते है और उन्हें लंबा अनुभव भी होता हैं। इन्हीं दलीलों के चलते चिकित्सा, शिक्षा, अनुसंधान से संबंधित विभगों में तो सेवानिवृति की आयु सीमा बढ़ा दी गई है जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में विचार हो रहा है। इसके रास्ते में यदि कोई रुकावट है तो वह बेरोजगार युवाओं की बढ़ती संख्या है कि जिसे ज्यादा लंबे समय तक नजरअंदाज भी नहीं किया सकता। इस लिहाज से कुछ लोगों का मानना है कि देश की बढ़ती औसत आयु और सेवारत लोगों की काम करते रहने की इच्छा भी रोजगार के अवसर घटा रही है। यह एक नई तरह की चुनौती है जिससे निपटने के लिए तरह-तरह के उपाय सुझाए जा रहे हैं। पारंपरिक सोच कहती है कि लोग समय पर रिटायर हों और उनके स्थान पर बना देरी के नए लोगों को नौकरी मिले, जबकि नई सोच रोजगार के नए अवसरों के सृजन की वकालत करती है। बहरहाल, जहां-जहां सेवानिवृति की आयु सीमा में बढ़ोतरी की जा रही है, वहां-वहां रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।