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JitendraGuthriya


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ारत के लोगों के लिये विशाल योगदान को याद करने के लिये बहुत ही खुशी से भारत के लोगों द्वारा अंबेडकर जयंती मनायी जाती है। डॉ भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के पिता थे जिन्‍होंने भारत के संविधान का ड्रॉफ्ट (प्रारुप) तैयार किया था। वो एक महान मानवाधिकार कार्यकर्ता थे जिनका जन्‍म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उन्‍होंने भारत के निम्‍न स्‍तरीय समूह के लोगों की आर्थिक को बढ़ाने के साथ ही शिक्षा की जरुरत के लक्ष्‍य को फैलाने के लिए भारत में वर्ष 1923 में बहिष्‍कृत हितकरनी सभा की स्‍थानपना की थी। इंसानों की समता के नियम अनुसरण के द्वारा भारतीय समाज को पुनर्निर्माण के साथ ही भारत में जातिवाद को जड़ से हटाने के लक्ष्‍य के लिये ''शिक्षित करना-आंदोलन करना-संगठित करना'' के नारे का इस्‍तेमाल कर लोगों के लिये वो एक सामाजिक आंदोलन चला रहे थे। अस्‍पृश्‍य लोगों के लिये बराबरी के अधिका की स्‍थापना के लिए महाराष्‍ट्र के महाड में वर्ष 1927 में उनके द्वारा एक मार्च का नेतृत्‍व किया गया था जिन्‍हें ''सार्वजनिक चॉदर झील'' के पानी का स्‍वाद या यहाँ तक की छूने की भी अनुमति नहीं थी। जाति विरोध आंदोलन, पुजारी विरोधी आंदोलन और मंदिर में प्रवेश आंदोलन जैसे सामाजिक आंदोलनों की शुरुआत करने के लिए भारतीय इतिहास में उन्‍हें चिन्‍िहित किया जाता है। वास्‍तविक मानव अधिकार और राजनीतिक न्‍याय के लिये महाराष्‍ट्र के नासिफ में वर्ष 1930 में उन्‍होंने मंदिर में प्रवेश के लिये आंदोलन का नेतृत्‍व किया था। उन्‍होंने कहा कि दलित वर्ग के लोगों की सभी समस्‍याओं को सुलझाने के लिये राजनीतिक शक्ति की एकमात्र तरीका नहीं है, उन्‍हें समाज में हर क्षेत्र में बराबर का अधिकार मिलना चाहिये। 1942 में वाइसराय की कार्यकारी परिषद की उनकी सदस्‍यता के दौरान निम्‍न वर्ग के लोगों के अधिकारों को बचाने के लिये कानूनी बदलाव बनाने में वो गहराई से शामिल थे।
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