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बिना किसी समस्या के जीवन भर स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा सुरक्षित एवं आसान तरीका योग है। इसके लिए केवल शरीर के क्रियाकलापों और श्वांस लेने के सही तरीकों का नियमित अभ्यास करने की आवश्यकता है। यह शरीर, मस्तिष्क और आत्मा के बीच हो रहे संपर्क को नियमित करता है। यह ही नहीं, योग आपके दिमाग और शरीर को परेशानियों से बचाता है। यह भी देखा गया है कि योग स्वास्थ्य, ज्ञान और आन्तरिक शान्ति को बनाए रखने में मदद करता है। अच्छे स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए यह हमारी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करता है। ज्ञान के माध्यम से यह मानसिक आवश्यकताओं को पूरा करता है और आन्तरिक शांति के माध्यम से यह आत्मिक आवश्यकता को पूरा करता है। इस तरह से योग हम सभी के बीच सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है। योग के विभिन्न आसन मानसिक और शारीरिक मजबूती के साथ अच्छाई की भावना का भी निर्माण करते हैं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि सामाजिक भलाई को बढ़ावा देने में योग का बहुत बड़ा योगदान है।
बुंदेलखण्ड का एक छोटा सा गांव। गांव में बहुत ही सीधा पर परिश्रमी किसान रहता था। नाम तो था उसका रामावतार पर लोगों ने उसे रामौतार बना दिया। उसकी सिधाई के कई किस्से गांव में प्रचलित थे। बाद में उस गांव में बसे लोग तो आश्चर्य करते कि इतने बेवकूफ और सीधे आदमी को आखिर किसने अपनी लड़की ब्याह दी।
पर जैसी कि कहानी है 'सीधा का राम सहाय' होता है। रामौतार का जीवन भी राम भरोसे चलता रहा। उसकी शादी हुई, मोड़ा-मोड़ी हुए। लड़की जब शादी लायक हुई तो रामौतार को चिंता लगी। घरवाली उठते-बैठते, सुबह-शाम टोकती कि हाथ पे हाथ धरे क्या बैठे हो, नाते-रिश्तेदारों से मिलो और लड़की के हाथ पीले करो। बिचारा रामौतार,ढंग से किसी से बात तो कर नहीं पाता था, फिर लड़की की शादी जमाना कोई आसान बात है। न जाने कितने पापड़ बेलने पड़े उसे, तब कहीं जाकर लड़की की सगाई हो पाई। नाते-रिश्ते के लोगों ने मदद कर शादी का मुहूर्त भी निकलवा लिया। पहली और उस पर इकलौती लड़की की शादी। बड़े जोर-शोर से तैयारियां होने लगीं। वह तो कुछ जानता समझता था नहीं। गांव वाले जैसा कहते गए, वह करता गया। रामौतार के अलावा घर में कोई और तो था नहीं, सो बिचारा शादी की तैयारी में पागल हो गया। खैर, रामभरोसे जैसे-तैसे पूरी व्यवस्था हो गई।
शादी के दिन सभी नाते-रिश्तेदारों और गांव वालों के साथ रामौतार सजा सजाया बारात की अगवानी के लिए तैयार होकर खड़ा था। काफी देर होने पर भी जब बारात का कोई संकेत भी न दिखा। तो बेचारा बड़ा घबड़ाया कि कहीं कोई गड़बढ़ तो नहीं हो गई। गांव वालों ने समझाया भी कि दूर गांव से आने वाली बारात में देर-सबेर तो हो ही जाती है, पर उसे कहां चैन ! उसे इस तरह घबरया हुआ देख एक को शरारत सूझी।