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JitendraGuthriya
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कई बार हमें यह तक याद नहीं रहता कि अलमारी, तिजोरी या कार की चाबियां कहां रख दीं। याददाश्त में कमी की वजह उम्र है या फिर हम इसे बदलने के लिए कुछ कर सकते हैं। पहले हमें भूलने की वजह पता लगानी होगी। इसके बाद उपाय किया जा सकता है। हम सब ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां जिंदगी की जरूरतों से बहुत तनाव पैदा होता है व याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है। जब कई विचार दिमाग में घूम रहे हों तो किसी एक विषय पर केंद्रित कर पाना कठिन हो जाता है। गुस्सा, घबराहट व ड़र भी हमारी तार्किक शक्ति पर असर डालते हैं। ऐसे हालात में तर्कशक्ति पर ही सबसे बुरा असर पड़ता है। ऑफिस में बॉस की डांट पड़ जाए तो लोक काम पर ध्यान देने की बजाए उन्हीं बातों में उलझे रहते हैं नतीजतन एकाग्रत में कमी व भूलने की आदत पैदा हो जाती है। कुछ उपयोगी सुझाव अपने नजरिए और जीवन-शैली में बदलाव लाएं। शांत रहना सीखें। नजरिया एकदम साफ होना चाहिए। जीवन की आपा-धापी व तनाव को झेलने के लिए गहरी सांसें लें। तनाव में रक्तचाप व उत्तेजना बढ़ जाती है। गहरी सांस लेने में थोड़ी मेहनत लगती है पर सक्रिय जीवन जीने में आसानी होती है। एकाग्रता का ध्यान से गहरा नाता है। उम्र के शुरुआती दौर में ही इस आदत को अपनाना चाहिए। इसे तब तक लगातार करते रहें, जब तक आदत न बन जाए। यह रवैया न अपनाया तो याद नहीं रहेगा कि आप से क्या कहा गया था। शुरुआत से ही वस्तुओं पर केंद्रित रहना भटकाव जिंदगी का एक हिस्सा बन जाएगा। हो सकता है हमें पिछले हफ्ते के अखबार के हेडलाइन या रात्रिभोज का स्थान याद न रहे। लेकिन मित्रों से पहली मुलाकात, पहला प्यार और स्थान कोई नहीं भूलता। इसका मतलब यह हुआ कि हमारी याददाश्त उन बातों पर केंद्रित रहती है, जो हमें अच्छी लगती है व दिनचर्या से जुड़ी बातें भूल जाती हैं। बुद्ध अकादमी टीकमगढ़।