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LomasVerma
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जन आक्रोश रैली के जरिए एक प्रकार से मोदी सरकार के खिलाफ अपने गुस्से का ही इजहार किया। भले ही उन्होंने ये साबित करने की कोशिश की हो कि देश में कहीं कुछ नहीं हो रहा है और चारों ओर निराशा है, लेकिन ये विडंबना है कि जिस दिन वह ये सब कुछ कह रहे थे, उस दिन सरकार की इस उपलब्धि की चर्चा हो रही थी कि उसने देश के सभी गाँवों में बिजली पहुँचाने का काम तय समय से पहले ही पूरा कर दिया। दरअसल, जब किसी की आलोचना नीर-क्षीर ढ़ंग से नहीं की जाती, तब ऐसा ही होता है। राहुल गाँधी चारों तरफ गड़बड़ी और अव्यवस्था नजर आ रही है तो संभवतः इस कारण कि वह गुस्से से भरे हुए हों। क्या ये अजीब नहीं है कि जो राहुल गाँधी कुछ समय पहले तक यह प्रचारित किया करते थे कि मोदी सरकार गुस्से वाली सरकार है, वहीं अब वह स्वयं गुस्से का प्रदर्शन करने में लगे हुए हैं? शायद यही कारण है कि वह विदेशी नीति पर भी सरकार की निराधार आलोचना करने में संकोच नहीं कर रहे? समझना कठिन है कि मोदी सरकार की हाल की चीन यात्रा को निशाना बनाने की क्या जरूरत थी? राहुल ने सवाल पूछा कि क्या प्रधानमंत्री ने चीनी नेतृत्व में डोकलाम पर चर्चा की? यह सवाल उछालने से पहले अच्छा होता कि वह यह स्पष्ट करते की जिस समय डोकलाम में तनातनी चल रही थी उस समय उन्हें चीनी राजदूत से मुलाकात करने और उसको छिपाने की क्या आवश्यकता था।