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JitendraBaghel
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मिले हो तुम हमको बड़े नसीबो से चुराया है मेनें किसमत की लकीरो से । तेरी मोहब्बमतों से सांसे मिली है सदा रहना दिल में करीब हो के ।तेरी चाहतों में कितने तड़पे है सावन भी कितने तुम बिन कितने बरसे है जिंदगी मे मेरी सारी जो भी कमी थी तेरे आ जाने से अब नहीं रही। सदा ही रहना तुम मेरे करीब हो के चुराया है मैनें किस्मरतम की लकीरों से ।मिले हो तुम हमको बड़े नसीबों से चुराया है मैने किसमत की लकी।रो से । बाहों में तेरी अब यारा जन्नत है मांगी खुदा से वो मन्नहत है तेरी वफा का सहारा मिला है । तेरी ही वजह से मे जिंदा हूं । तेरी मोहब्बलत से जरा अमीर हो के चुराया है मैंने किसमत की लकीरो से । मिले हो तुम हमको बडे नसीबो से चुराया है मैने किसमत की लकीरो से ।