words per minute

8

AvdheshKumar6242


00:00

Speed

नादिकाल से पुरुष और नारी दोनों ने पारस्परिक सहयोग द्वारा सृष्टि को बढ़ाया है, समाज की कार्यकुशलता और उसकी गतिविधायों को अर्थ प्रदान किया है। निश्चय ही दोनों में से किसी भी एक के होने पर संसार का स्वरूप ही कुछ और होता। यदि हम वर्तमान समाज की बात भी लें तो नर-नारी दोनों की ही समान आवश्यकता आज भी है। दोनों में से किसी भी एक के ने रहने पर किसी समाज की क्या अवस्था हो सकती है इसकी कल्पना हम आसानी से कर सकते हैं। जैसे किसी गाड़ी के दोनों पहियों की स्थिति पर गाड़ी की गति बहुत कुछ निर्भर करती है वहीं स्थिति परिवार, समाज और मानव मात्र की है। स्वस्थ और सुदृढ़ अंगों से ही सुगठित और कार्यकुशल शरीर की कल्पना की जा सकती है। ठीक यही स्थिति परिवार या जीवन में नारी-पुरुष की है। दोनों परस्पर एक दूसरे के लिए और दोनों के स्नेह और सौहार्द की आवश्यकता समाज के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वस्थ समाज में नारी की भूमिका अनेकमुखी है। नारी समाज के आधे अंग का प्रतिनिधित्व करती है। उसकी कार्यक्षमता समाज के लिए जितनी उपादेय है उतना ही महत्वपूर्ण नारी की व्यक्तित्व भी है। वास्तव में प्रकृति ने नारी और पुरुष दोनों की रचना में समाज के उपयोग के कुछ विशेष तत्वों का मिश्रण किया है। अत: प्राकृतिक विधान के अनुसार नारी की कुछ खास विशेषताएँ हैं जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। समाज के सर्वांगीण विकास में तो नारी की महत्वपूर्ण भूमिका है ही, व्यक्ति के लिए तो उसकी भूमिका अनेक दृष्टियों से अनिवार्य-सी है।
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 485 - English

words per minute