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LomasVerma
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घड़े की यह विशेषता होती है कि यदि उसमें पानी पूरा भरकर चला जाए तो पानी रास्ते में छलक कर नहीं गिरता, परंतु घड़े में पानी के कम भरे होने पर पानी छलक कर गिरता है। पानी को घड़े से टकराने के लिए स्थान मिल जाता है। जिसके कारण टकराने की ध्वनि भी उप्पन्न होती है। यही दशा अल्प ज्ञान रखने वाले की भी होती है। मंद बुद्धि तथा अल्प ज्ञानी अपने ज्ञान का ढिंढोरा पीटते रहते है। विषय की पूर्ण जानकारी न होने के कारण वे यह समझते हैं कि उनके बराबर दूसरे लोग ज्ञानवान नहीं है। ऐसे लोग अनावश्यक वाद-विवाद कर अनुचित टीका-टिप्पणी किया करते हैं। मामूली बातों पर दूसरों की आलोचना करना इनका नित्य का काम रहता है। इनके विरुद्ध ज्ञानवान व्यक्ति वाक्-संयम से काम लेता है। वह जानता है कि ज्ञान के अथाह सागर में उसकी स्थिति एक बूँद के समान है। भरे हुए घड़े की भाँति ज्ञानी अपने ज्ञान को समेटे रहता है तथा समुचित पात्र मिलने पर ही अपने ज्ञान का निस्सारण करता है। अल्प ज्ञानी बिना माँगे ही सलाह देता है। जीवन एक पहेली के समान है। जिस प्रकार पहेली सभी के लिए उलझनयुक्त और कठिन अर्थ वाली होती है उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी अनेक प्रकार के रहस्यों से पूर्ण रहता है। वह किस समय क्या करने जा रहा है इसका अनुमान कोई नहीं लगा सकता। लेकिन इससे भी अधिक अबूझ वस्तु है ईश्वर का विधान। मनुष्य कुछ करना चाहता है पर ईश्वर की इच्छा और ही होती है। वह अपने नियम के अनुसार मनुष्य का कार्य पूरा करता या नहीं करता है।