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यह मामला चंद्रावती देवी बनाम बिहार राज्य से संबंधित है। स्वापक औषधि और मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 की उपधारा 20(ख) की मंशा यह है कि तस्करी के लिए कब्जे में अवैध गांजा पाया जाना, मजिस्ट्रेट के समक्ष मुद्देमाल पेश नहीं किया जाना, यदि छापामार दल द्वारा अभिगृहीत की गई वस्तुएं मालखाने में लाकर रखी गई और उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया न अभिगृहीत सामग्री को विनिष्ट करने के बारे में कोई सूचना दी गई और न मालखाना रजिस्टर पेश किया तो अधिनियम के कानूनी उपबंधों का अतिक्रमण हुआ है, उनके अनुपालन से अभियोजन पक्ष के कथन दूषित हैं। संज्ञान में लिया गया मामला इस प्रकार है कि तारीख 15 जुलाई, 2011 को लगभग 8:30 जे पूर्वाह्न थानागृह अधिकारी धनबाद पुलिस थाना श्री सुबोध कुमार मिश्रा ने पुलिस थाने पर एक गुप्त सूचना प्राप्त की कि मोहल्ला हेमनगर पर राम राय के मकान में 2 व्यक्ति किरायेदार के रूप में रह रहे हैं और गांजा के कारोबार में लगे हुए हैं और उन्होंने तस्करी के प्रयोजन के लिए उक्त मकान में गांजा को छुपा रखा है। इसके पश्चात् इत्तिला लेने वाले ने धनबाद पुलिस थाना में सान्हा अभिलिखित किया और पुलिस दल जिसमें आनंद कुमार अभियोजन साक्षी क्रमांक 4 एवं अभियोजन साक्षी सम्मिलित हैं, के साथ घटनास्थल की ओर अग्रसर हुए और लगभग 8:45 बजे पूर्वाह्न 2 स्थानीय स्वतंत्र साक्षी राम राय और संतोष मिस्त्री के साथ हेमनगर पहुँचे और राम राय के मकान पर छापा मारा जिसे उसने किरायेदार पर दिया था। आगे मामला इस प्रकार है कि पुलिस दल को देखकर एक व्यक्ति ने कमरे से भागने की कोशिश की परन्तु उस पकड़ लिया गया और उसने अपना नाम राकेश सिंह बताया तथा उसकी मौजूदगी में कमरे की तलाशी ली गई। कोरालाइट कंपनी का एक इधर-उधर ले जाने वाला थैला जिसमें गांजा के 3 पैकेट रखे गए थे और प्रत्येक में लगभग 5 किलो गांजा था तथा एक अन्य प्लास्टिक थैले में गांजा के 2 पैकेट रखे गये थे। इस तरह कुल 25 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। वह व्यक्ति जिसे गिरफ्तार किया गया था, उसने यह बताया कि वह तस्करी के लिए चकिया मोतीहारी से गांजा लाया हे और उक्त गांजा सुनियोजित तरीके से झारखंड भेजा जाना था। उसने यह भी बताया कि उसके कारोबार में चंद्रावती देवी हो उसकी भाभी हैं उसकी मकान में रहतीं हैं और वह भी इस कृत्य में सम्मिलित हैं। चारपाई की तलाशी लेने पर तकिए के नीचे से 39 हजार रुपये भी बरामद किए गए थे। प्रकरण की अग्रिम कार्यवाही क्रमंश: