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यह मामला पूर्व में बताए गए अपीलीय निर्णय में माननीय न्यायालय द्वारा की गई अग्रिम कार्यवाही से संबंधित है जिसमें मकान के अंदर से गांजा की बरामदगी हुई है न कि संयोग की बरामदगी का बल्कि यह एक ऐसा मामला है जो अभियोजन का यह विनिर्दिष्ट मामला है कि पुलिस थाने पर इत्तिलाकर्ता से प्राप्त की गई सूचना और उसका कार्रवाई के अग्रसर होना तथा भवन में तलाशी ली जानी जिसके बारे में अपीलार्थियों के किराये का कमरा होना अभिकथित है और, इसलिए, स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम की धारा 42(1) का अनुपालन खास तौर पर विचारण को दूषित करता है। तथापि, अभियोजन साक्षी क्रमांक 5 इत्तिलाकर्ता का साक्ष्य है कि उसने कथन अभिलिखित किया और सान्हा प्रविष्टि बनाई परन्तु उसे न तो पेश किया गया और न ही सान्हा प्रविष्टि का उल्लेख किया गया है और न ऐसा कोई साक्ष्य है कि उक्त लिखित रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई थी। इसलिए, इन तथ्यों का अवलोकन करने पर यह प्रकट हुआ है कि स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम की धारा 42(2) का अनुपालन यहां भंग हुआ है जो अधिनियम की धारा 42(1) की प्रकृति में आज्ञापक है, इस बात को साबित नहीं किया गया है और जो कुछ भी अभिलिखित किया गया है न तो उसे रखा गया है और न ही उसे न्यायालय में पेश किया गया है। माननीय न्यायाधीश ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए लेख किया कि मैंने यह निष्कर्ष निकाला है कि विचारण न्यायालय द्वारा अभिलिखित दोषसिद्धि ओर दंडादेश का आदेश कायम रखे जाने योग्य नहीं है चूँकि स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम की धारा 42(1) में अंतर्विष्ट उपबंधों का अनुपालन न करने से संपूर्ण विचारण दूषित है। अत: मैंने यह निष्कर्ष निकाला और उस पर यह अभिनिर्धारित किया कि अभियोजन पक्ष सभी युक्तियुक्त संदेह से परे अपीलार्थियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप को साबित करने में समर्थ नहीं हुआ है और धनबाद पुलिस थाना मामला संख्या 139/2011 से उद्भूत स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ मामला संख्या 12/2011 के संबंध में श्री बलराम सिंह विद्वान प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सारण, छपरा द्वारा तारीख 3 सितंबर, 2014 को पारित किए गए दोषसिद्धि आदेश और तारीख 9 सितंबर, 2014 को पारित किए गए दंड का आदेश अपास्त किया जाता है और दोनों अपीलों को मंजूर किया जाता है। वर्ष 2014 की दांडिक अपील के अपीलार्थी राकेश सिंह जो वर्तमान में अभिरक्षा में हैं यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल निर्मुक्त किया जाए। अपील मंजूर की गई।