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RaniMohanBillore
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महोदय, आज हम विश्वास कर सकते हैं कि अंधेरे से भारत निकला। शायद पहली बार इन पिछले 3, 4 वर्षों में हम और आप सूर्य की रोशनी में बैठे हैं और यह रोशनी है जो हमारे देश में उजाला दे रही है। लेकिन जहाँ बहुत क्षेत्रों में, बहुत घरों में, चंद शहरों में उजाला है, हम कैसे भूलें कि बहुत से अंधेरे घर और भी हैं। हम कैसे भूलें उन किसानों को जिनकी जमीन पर सिंचाई नहीं होती? हम कैसे भूलें अपने उन करोड़ों हरिजन भाई-बहनों को या गिरीजन भाई-बहनों को या पिछड़ी जाती के भाई-बहनों को या उन्हें जो पहाड़ में रहते हैं या उन्हें जो जंगल में रहते हैं। हमारे आदिवासी भाई और बहन, उनके घरों में यह स्वतंत्र भारत का उजाला वैसे नहीं चमक रहा है जैसा हमारी आशा थी, जैसा हमने उनको वायदा किया था कि स्वतंत्रता के बाद उनको रोशनी मिलेगी।
यह सब काम हमारे सामने आगे करने को है। लेकिन मैं यह भी कह सकती हूँ कि उस रास्ते में हम चलें और समाजवाद के रास्ते पर और आगे बढ़ने के लिए मजबूती से कदम उठाने पड़ेंगे। यह रास्ता भारत की जनता का चुना हुआ, भारत के लोकतंत्र का चुना रास्ता था और उसी रास्ते का एक कदम अभी हाल में लिया गया। आप सबको मालूम बै कि वह क्या है? वह था कुछ बैंको का राष्ट्रीयकरण। मुझे मालूम है कि इस कदम का कितना बड़ा स्वागत जनता में हुआ। मुझे मालूम है कि कितने छोटे और बड़े लोग हमारे पास आए या मुझे लिखा या संदेश भेजा मुझे बताने के लिए कि यह कदम एक ठीक कदम है।